चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में नई सरकार बनने के कुछ ही समय बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को लेकर बड़ा दावा किया है। स्टालिन ने संकेत दिए हैं कि मौजूदा सरकार अपना पूरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम ने अन्य दलों के समर्थन से सरकार बनाई थी और इसके बाद विजय ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि अब विपक्ष इस सरकार की स्थिरता पर सवाल उठा रहा है।
स्टालिन ने क्यों उठाए सरकार की स्थिरता पर सवाल?
एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए एमके स्टालिन ने कहा कि मौजूदा सरकार ऐसे दलों के समर्थन पर टिकी है जो हाल तक डीएमके गठबंधन का हिस्सा थे। उनका कहना था कि चुनावी परिणामों के आधार पर टीवीके को अकेले सरकार चलाने का स्पष्ट जनादेश नहीं मिला।
स्टालिन ने दावा किया कि वर्तमान सरकार गठबंधन समीकरणों की वजह से बनी है और इसी कारण उसके लंबे समय तक स्थिर रहने को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
‘बहुमत नहीं, समर्थन के सहारे बनी सरकार’
डीएमके प्रमुख ने कहा कि सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत का आंकड़ा टीवीके अपने दम पर हासिल नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि जनता का रुझान अलग था लेकिन चुनाव बाद बने राजनीतिक समीकरणों ने सत्ता की तस्वीर बदल दी।
उन्होंने बयान में कहा कि मौजूदा व्यवस्था राजनीतिक समर्थन के सहारे आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में इसकी मजबूती की असली परीक्षा होगी।
तमिलनाडु में क्या रहा चुनावी गणित?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके को 108 सीटें मिली थीं। वहीं डीएमके 59 सीटों पर सिमट गई। एआईएडीएमके को 47 सीटें मिलीं जबकि कांग्रेस और अन्य दलों के खाते में 20 सीटें गईं।
चुनाव के दौरान कांग्रेस डीएमके गठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन नतीजे आने के बाद उसने टीवीके को समर्थन दे दिया। इसी समर्थन के बाद गठबंधन ने सरकार बनाई और जोसेफ विजय मुख्यमंत्री बने।
सरकार पर बयान से तेज हुई राजनीतिक हलचल
स्टालिन के बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सत्ता पक्ष इन दावों का किस तरह जवाब देता है और आने वाले समय में गठबंधन की स्थिति कैसी रहती है।