नई दिल्ली: लंबे समय तक अनशन या भूख हड़ताल के बाद किसी व्यक्ति को सीधे सामान्य भोजन नहीं कराया जाता। आमतौर पर अनशन नारियल पानी, फलों के जूस, शहद मिले पानी या अन्य हल्के तरल पदार्थों से तुड़वाया जाता है। इसके पीछे चिकित्सकीय कारण होते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे उपवास के बाद शरीर और पाचन तंत्र को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लाना जरूरी होता है, ताकि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम से बचा जा सके।
सीधे खाना खिलाना क्यों हो सकता है खतरनाक?
डॉक्टरों के अनुसार, कई दिनों तक भोजन न मिलने पर पाचन तंत्र की गतिविधियां धीमी पड़ जाती हैं। ऐसे में यदि अचानक रोटी, चावल या अन्य भारी भोजन दिया जाए, तो पेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे उल्टी, पेट दर्द, अपच जैसी समस्याएं होने के साथ ही रिफीडिंग सिंड्रोम जैसी गंभीर स्थिति का खतरा भी बढ़ सकता है। यही वजह है कि शुरुआत हमेशा हल्के और आसानी से पचने वाले तरल पदार्थों से की जाती है।
तरल पदार्थ से शरीर को मिलती है तुरंत ऊर्जा
लंबे समय तक भूखे रहने के कारण शरीर में ग्लूकोज का स्तर काफी कम हो जाता है, जिससे कमजोरी, चक्कर और थकान महसूस हो सकती है। नारियल पानी, फलों का जूस या शहद मिला पानी प्राकृतिक शर्करा का अच्छा स्रोत होते हैं। ये शरीर में जल्दी अवशोषित होकर तुरंत ऊर्जा देने में मदद करते हैं और पाचन तंत्र पर भी अतिरिक्त दबाव नहीं डालते।
शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी भी होती है पूरी
अनशन के दौरान शरीर में पानी के साथ-साथ कई जरूरी खनिजों की भी कमी हो सकती है। नारियल पानी में पोटैशियम, सोडियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में तरल और खनिजों का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। इससे मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज को भी सहारा मिलता है।
धीरे-धीरे शुरू किया जाता है सामान्य भोजन
विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे उपवास के बाद पहले 24 से 48 घंटे तक केवल हल्के तरल पदार्थ दिए जाते हैं। जब शरीर इन्हें सामान्य रूप से पचाने लगता है, तब धीरे-धीरे दलिया, खिचड़ी और बाद में सामान्य भोजन शुरू कराया जाता है। इससे पाचन तंत्र को सुरक्षित तरीके से दोबारा सक्रिय होने का समय मिल जाता है।