नई दिल्ली: हरतालिका तीज का व्रत इस साल 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर पड़ने वाले इस पर्व में सुहागिन महिलाएं 24 घंटे का निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। हरतालिका तीज की पूजा में बेदी या मंडप को फूलों और पत्तियों से बने फुलेरा से सजाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता में फुलेरा का दर्शन और उसके नीचे बैठकर पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। आखिर यह फुलेरा क्या होता है और इसका माता पार्वती की तपस्या से क्या संबंध है?
फुलेरा क्या होता है और क्यों सजाया जाता है?
फुलेरा ताजे फूलों, लताओं और पत्तियों से तैयार किया जाने वाला एक सुंदर पुष्प मंडप होता है। इसे छत्र भी कहा जाता है। हरतालिका तीज की पूजा में इसे बालू या मिट्टी से बनाए गए पार्थिव शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा के ऊपर सजाया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, फुलेरा के नीचे बैठकर पूजा करने और श्रद्धा से इसका दर्शन करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है। इसे संतान सुख से भी जोड़कर देखा जाता है।
कई खास फूल-पत्तियों से तैयार होता है फुलेरा
फुलेरा को तैयार करने के लिए अलग-अलग तरह के फूलों और वनस्पतियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें धतूरे का फूल, मदार, चिलबिनिया, नवकंचनी, सागौर, हनुमंत सिंदूरी, बिंजोरी, रांग पुष्प और मौसत फूल शामिल किए जाते हैं।
इसे तैयार करने में करीब 4 से 5 घंटे का समय लग जाता है और इसकी लंबाई लगभग 7 फुट बताई गई है। फुलेरे में नवबेलपत्र, लज्जावती, शिल भिटई, शिवताई, हिमरितुली और चरबेर के साथ झानरपत्ती, त्तिलपत्ती और सात प्रकार की शमी पत्तियां भी लगाई जाती हैं। धार्मिक परंपरा में इन फूलों और पत्तियों को माता पार्वती की वन में की गई तपस्या से जोड़ा जाता है।
मां पार्वती की तपस्या से क्या है संबंध?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वन में रहकर कठिन तपस्या की थी। इस दौरान उन्होंने रेत से शिवलिंग बनाया, उसे फूलों से सजाया और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा की।
हरतालिका तीज पर फुलेरा सजाने की परंपरा को इसी तपस्या की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति माना जाता है। ग्रामीण परंपराओं में आज भी मिट्टी से बने शिव-पार्वती के विग्रह के ऊपर फूल-पत्तियों से मंडप सजाने की प्रथा चली आ रही है।
एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, फुलेरे से नीचे की ओर लटकने वाले फूल भगवान शिव की पांच पुत्रियों का प्रतीक माने जाते हैं। इनके नाम विषहरा, शामिलबारी, जया, देव और दोतली बताए गए हैं।
फुलेरा दर्शन से क्या लाभ मिलने की मान्यता है?
हरतालिका तीज पर फुलेरा दर्शन को धार्मिक रूप से विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इसके दर्शन से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और वैवाहिक जीवन से जुड़े कष्ट दूर होते हैं।
इसके अलावा फुलेरा दर्शन को शीघ्र विवाह के योग बनने, मनोकामनाएं पूर्ण होने और पापों से मुक्ति से भी जोड़ा जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इससे जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।