सेहत

सिगरेट छोड़ना इतना मुश्किल क्यों? 95% लोग फिर पकड़ लेते हैं धूम्रपान की आदत, विशेषज्ञों ने बताई बड़ी वजह

नई दिल्ली: तंबाकू और सिगरेट की लत आज भी भारत में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार देश में करोड़ों लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं, जबकि हर साल लाखों लोगों की मौत तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, फिटनेस ट्रेंड और बेहतर जीवनशैली अपनाने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग धूम्रपान की आदत छोड़ने में सफल नहीं हो पाते।

विशेषज्ञों का कहना है कि सिगरेट छोड़ना केवल इच्छाशक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह शरीर और मस्तिष्क दोनों से जुड़ी एक जटिल लत है। यही वजह है कि धूम्रपान छोड़ने की कोशिश करने वाले अधिकांश लोग कुछ समय बाद फिर से इसकी ओर लौट जाते हैं।

हर 100 में से 95 लोग क्यों लौट आते हैं सिगरेट की ओर?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक धूम्रपान छोड़ने की सफलता दर अब भी बेहद कम है। आंकड़े बताते हैं कि हर 100 लोगों में से लगभग 95 लोग कुछ समय बाद दोबारा सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि निकोटीन की लत व्यक्ति के मस्तिष्क के उन हिस्सों को प्रभावित करती है, जो आनंद, संतुष्टि और आदतों को नियंत्रित करते हैं। ऐसे में सिगरेट छोड़ना केवल एक व्यवहारिक बदलाव नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक चुनौती भी बन जाता है।

निकोटीन नहीं, धुएं में छिपा है बड़ा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार लोगों के बीच यह धारणा आम है कि धूम्रपान से होने वाली सभी बीमारियों का कारण केवल निकोटीन है। जबकि वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि सिगरेट जलने के दौरान निकलने वाले जहरीले रसायन और धुआं शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।

निकोटीन मुख्य रूप से लत पैदा करता है, लेकिन कैंसर, फेफड़ों की बीमारियां और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के पीछे तंबाकू के जलने से बनने वाले हानिकारक तत्वों की बड़ी भूमिका होती है।

धूम्रपान छोड़ने में सबसे बड़ी बाधा बनते हैं ये लक्षण

जब कोई व्यक्ति सिगरेट छोड़ने की कोशिश करता है, तो उसे कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें बेचैनी, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, बार-बार धूम्रपान की इच्छा होना, नींद में परेशानी और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं शामिल हैं।

इन्हीं लक्षणों के कारण कई लोग शुरुआत में धूम्रपान छोड़ने का फैसला तो कर लेते हैं, लेकिन कुछ दिनों या हफ्तों बाद फिर से सिगरेट पीने लगते हैं।

निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी कैसे करती है मदद?

दुनियाभर में निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी को धूम्रपान छोड़ने में सहायक माना जाता है। निकोटीन गम और लोजेंज जैसे विकल्प लोगों को धीरे-धीरे धूम्रपान की लत से बाहर आने में मदद कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सही मात्रा में निकोटीन सपोर्ट मिलने से धूम्रपान छोड़ने के दौरान होने वाली तीव्र इच्छा और अन्य परेशानियों को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में भी ऐसी विधियों को अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी बताया गया है।

युवाओं की फिटनेस और जीवनशैली पर भी पड़ रहा असर

धूम्रपान का असर केवल भविष्य में होने वाली बीमारियों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार आज कम उम्र के लोगों में भी सिगरेट का असर साफ दिखाई देने लगा है।

कम स्टैमिना, जल्दी थकान, सांस फूलना, नींद की खराब गुणवत्ता, फिटनेस में गिरावट और तनाव से उबरने में कठिनाई जैसी समस्याएं युवाओं में तेजी से बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी, कार्यक्षमता और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जागरूकता का संदेश

हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को तंबाकू और धूम्रपान से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान छोड़ना कठिन जरूर है, लेकिन सही मार्गदर्शन, चिकित्सकीय सहायता और दृढ़ संकल्प के जरिए इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

बढ़ती जागरूकता के बीच अब जरूरत इस बात की है कि लोग तंबाकू की लत को केवल आदत नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समझें और समय रहते इससे दूरी बनाएं।

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