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AI और डिजिटल क्रांति का नया केंद्र बनेगा भारत! डेटा सेंटर में अरबों डॉलर का निवेश, लाखों नौकरियों के खुलेंगे रास्ते

नई दिल्ली: भारत तेजी से दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल और तकनीकी केंद्रों में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं और बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के दौर में देश को वैश्विक डेटा सेंटर हब बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार की नीतियों और घरेलू बाजार की विशाल क्षमता के चलते दुनिया की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक डेटा सेंटर उद्योग का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

देश में इस समय मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और नोएडा जैसे शहर डेटा सेंटर विकास के बड़े केंद्र बनकर उभर रहे हैं। यहां ऐसे आधुनिक केंद्र विकसित किए जा रहे हैं, जहां भारतीय उपभोक्ताओं का डेटा देश के भीतर ही सुरक्षित रूप से संग्रहीत किया जा सकेगा।

2030 तक क्षमता तीन गुना करने का लक्ष्य

भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक देश की डेटा सेंटर क्षमता को तीन गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दिशा में कई वैश्विक और भारतीय कंपनियां बड़े निवेश की तैयारी में हैं। सरकार की डेटा स्थानीयकरण संबंधी नीतियों के चलते तकनीकी कंपनियों के लिए भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा देश के भीतर संग्रहित करना महत्वपूर्ण हो गया है।

इसी वजह से बड़े शहरों और रणनीतिक स्थानों पर अत्याधुनिक डेटा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे डेटा सुरक्षा, निगरानी और डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता को मजबूती मिलेगी।

पूर्वी भारत पर भी बढ़ा फोकस

डेटा सेंटर विस्तार की दौड़ अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। पूर्वी भारत को भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका देने की तैयारी चल रही है। इसी कड़ी में विशाखापत्तनम को एक बड़े डेटा सेंटर केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए समुद्र के भीतर उच्च क्षमता वाली केबल नेटवर्क व्यवस्था विकसित करने की योजनाएं भी बनाई जा रही हैं। इससे डेटा ट्रांसफर की गति और विश्वसनीयता में सुधार होगा।

टेक कंपनियों का अरबों डॉलर का निवेश

भारत के डिजिटल भविष्य पर भरोसा जताते हुए कई वैश्विक तकनीकी कंपनियां यहां भारी निवेश कर रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत में डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए लगभग 200 अरब डॉलर तक निवेश करने की योजना पर काम कर रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जनरेटिव एआई तकनीकों के तेजी से विस्तार के कारण डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की मांग अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है। यही वजह है कि डेटा सेंटर उद्योग में निवेश लगातार बढ़ रहा है।

दुनिया के 20 प्रतिशत डेटा का स्रोत बन रहा भारत

भारत तेजी से वैश्विक डेटा उत्पादन के बड़े केंद्रों में शामिल हो रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, वर्तमान में दुनिया के कुल डेटा उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाएं, सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स और एआई आधारित प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ डेटा निर्माण की रफ्तार और तेज होने की संभावना है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर विकसित करना आवश्यक माना जा रहा है।

एआई मिशन ने बढ़ाई इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार

भारत के एआई मिशन ने भी डेटा सेंटर क्षेत्र को नई गति दी है। हाल के वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के बढ़ते उपयोग ने डेटा प्रोसेसिंग और कंप्यूटिंग क्षमता की मांग को कई गुना बढ़ा दिया है।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एआई आधारित सेवाओं के विस्तार के साथ और अधिक उन्नत तथा विशाल डेटा सेंटरों की आवश्यकता होगी, जिससे देश का डिजिटल ढांचा और मजबूत बनेगा।

भारतीय कंपनियां भी मैदान में उतरीं

सिर्फ वैश्विक कंपनियां ही नहीं, बल्कि भारत के बड़े औद्योगिक समूह भी इस क्षेत्र में बड़े निवेश की घोषणा कर चुके हैं। फरवरी 2026 में एक प्रमुख भारतीय समूह ने 100 अरब डॉलर निवेश कर एआई समर्थित डेटा सेंटर विकसित करने की योजना पेश की थी। इन केंद्रों को नवीकरणीय ऊर्जा आधारित प्रणाली पर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा एक अन्य प्रमुख भारतीय उद्योग समूह ने भी अगली पीढ़ी का कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए 120 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की है। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाना है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ

डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार का सबसे बड़ा फायदा रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलने वाला है। इन परियोजनाओं के जरिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही निर्माण, ऊर्जा, दूरसंचार, साइबर सुरक्षा और तकनीकी सेवाओं से जुड़े कई क्षेत्रों को भी गति मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा सेंटर उद्योग में हो रहा यह निवेश भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ देश को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाएगा।

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