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गुजरात में चांदीपुरा वायरस का यू-टर्न! 3 बच्चों की मौत के बाद अलर्ट, जानें क्यों साइलेंट किलर बन रही है यह ‘रेतीली मक्खी’

कोरोना और मंकीपॉक्स जैसे वायरस के बाद अब एक और खतरनाक वायरस ने दस्तक देकर हेल्थ एक्सपर्ट्स की नींद उड़ा दी है। गुजरात से आ रही खबरें डराने वाली हैं, जहाँ जानलेवा चांदीपुरा वायरस “Chandipura Virus” ने एक बार फिर वापसी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस खतरनाक इंफेक्शन की वजह से अब तक 3 बच्चों की जान जा चुकी है।

यह वायरस जितना रेयर है, उतना ही तेज और आक्रामक भी। मानसून की शुरुआत के साथ ही इस वायरस का खतरा कई गुना बढ़ गया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग को हाई अलर्ट पर डाल दिया है।

सिर्फ 48 घंटे और खेल खत्म?

चांदीपुरा वायरस की सबसे खतरनाक बात इसकी स्पीड है। डॉक्टरों के मुताबिक, शुरुआत में इसके लक्षण किसी नॉर्मल वायरल फीवर जैसे ही दिखते हैं, लेकिन देखते ही देखते यह सीधे बच्चे के दिमाग पर अटैक करता है और वहां बहुत तेजी से सूजन आ जाती है, जिसे मेडिकल भाषा में “Acute Encephalitis Syndrome” (AES) कहा जाता है।।

अगर सही समय पर इलाज न मिले, तो सिर्फ 48 से 72 घंटों के भीतर मरीज कोमा में जा सकता है। मेडिकल डेटा के अनुसार, इस वायरस का मृत्यु दर 56% से 75% तक है, यानी संक्रमित होने के बाद बचने के चांसेस बहुत कम हो जाते हैं।

आखिर कहाँ से आता है यह वायरस?

यह वायरस किसी इंसान के खांसने या छींकने से नहीं, बल्कि एक छोटे से कीड़े के काटने से फैलता है। इसे फैलाने का असली जिम्मेदार सैंडफ्लाई या रेतीली मक्खी को माना जाता है। बारिश के मौसम में उमस और गंदगी के कारण ये मक्खियाँ बेहद एक्टिव हो जाती हैं, जिससे संक्रमण फैलने का रिस्क बढ़ जाता है, 15 साल से कम उम्र के बच्चे इसके सबसे बड़े शिकार बनते हैं, क्योंकि बच्चों का इम्यून सिस्टम और नर्वस सिस्टम अभी पूरी तरह डेवलप नहीं होता।

 इन लक्षणों को ‘नॉर्मल बुखार’ समझने की गलती न करें

अगर आपके घर में बच्चे हैं, तो मानसून के इस सीजन में इन रेड फ्लैग्स पर रखें नजर:

अचानक 101°F (38.3°C) या उससे तेज बुखार आना, लगातार उल्टी होना और सिरदर्द की शिकायत। शरीर में अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी या सुस्ती आ जाना या चिड़चिड़ापन, दौरे पड़ना या बेहोशी छाना।

एक्सपर्ट की राय

अगर बुखार के साथ बच्चा बहुत ज्यादा सुस्त दिख रहा है या उसे उल्टी हो रही है, तो बिना एक मिनट गंवाए तुरंत नजदीकी अस्पताल भागें। यहाँ शुरुआती कुछ घंटे ही जिंदगी और मौत का फैसला करते हैं।

क्या इसकी कोई वैक्सीन या दवा है?

मेडिकल साइंस के पास फिलहाल चांदीपुरा वायरस से लड़ने के लिए न तो कोई स्पेसिफिक एंटीवायरल दवा है और न ही कोई वैक्सीन। हॉस्पिटल में डॉक्टर्स केवल लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए ‘सपोर्टिव थेरेपी’ (जैसे बुखार कम करना, हाइड्रेशन मेंटेन रखना) का सहारा लेते हैं। चूंकि कोई दवा नहीं है, इसलिए सावधानी ही एकमात्र ढाल है। डॉक्टर्स का कहना है की इन बेसिक रूल्स को फॉलो कर अपने बच्चों की रक्षा करे:

फुल-कवरेज क्लोदिंग: बच्चों को बाहर भेजते समय पूरी आस्तीन के कपड़े और फुल पैंट पहनाएं।

मॉडर्न मॉस्किटो रिपेलेंट्स: बच्चों की स्किन के लिए सेफ रिपेलेंट क्रीम, पैच या रोल-ऑन का इस्तेमाल करें। सोते समय मच्छरदानी बेस्ट ऑप्शन है।

हाइजीन ऑडिट: घर के आसपास कबाड़, कचरा या नमी जमा न होने दें। सैंडफ्लाई अक्सर दरारों और कचरे वाली जगहों पर पनपती हैं।

एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है की चांदीपुरा वायरस बेशक खतरनाक है, लेकिन सही जानकारी और अलर्टनेस से इसे मात दी जा सकती है। पैनिक न करें, बस सावधान रहें।

news desk

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