बीजिंग: चीन ने अपने हाई स्पीड रेलवे नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक साथ बड़ा कदम उठाया है। देश में एक ही दिन चार नई हाई स्पीड रेलवे लाइनों का संचालन शुरू किया गया है। इन परियोजनाओं के जरिए उत्तर, उत्तर-पश्चिम, मध्य और उत्तर-पूर्वी चीन के बीच रेल संपर्क को मजबूत किया गया है। तीन लाइनों पर ट्रेनें अधिकतम 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी, जबकि हारपिन-यीछुन लाइन पर परिचालन गति 250 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। नई रेल सेवाओं से यात्रियों की आवाजाही आसान होने के साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
चीन में जिन चार हाई स्पीड रेलवे सेक्शन का संचालन शुरू हुआ है, उनमें पेइचिंग-हांगकांग हाई स्पीड रेलवे का श्योंगआन-शांगछो सेक्टर, शीआन-छोंगछिंग हाई स्पीड रेलवे का शीआन-आनखांग सेक्टर, यीछांग-शिंगशान हाई स्पीड रेलवे और हारपिन-यीछुन हाई स्पीड रेलवे शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं की अपनी अलग रणनीतिक और आर्थिक अहमियत है। कुछ लाइनें बड़े शहरों को जोड़ती हैं, जबकि कुछ पर्यटन क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों को तेज रेल नेटवर्क से जोड़ने का काम करेंगी।
552 किलोमीटर का श्योंगआन-शांगछो सेक्टर क्यों अहम है?
नई शुरू हुई चार परियोजनाओं में पेइचिंग-हांगकांग हाई स्पीड रेलवे का श्योंगआन-शांगछो सेक्टर सबसे लंबा है। इसकी कुल लंबाई 552 किलोमीटर है। यह सेक्टर श्योंगआन न्यू एरिया के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। श्योंगआन न्यू एरिया चीन की प्रमुख विकास परियोजनाओं में शामिल है।
नई हाई स्पीड रेल सेवा से श्योंगआन और आसपास के क्षेत्रों के बीच आवागमन आसान होगा। तेज रेल संपर्क से लोगों की आवाजाही के साथ व्यापारिक गतिविधियों और आर्थिक संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके जरिए क्षेत्रीय स्तर पर समन्वित विकास को भी गति देने की कोशिश है।
शीआन-आनखांग लाइन से पर्यटन को कैसे मिलेगा फायदा?
दूसरी परियोजना शीआन-छोंगछिंग हाई स्पीड रेलवे का शीआन-आनखांग सेक्टर है। इसकी लंबाई 171 किलोमीटर है। यह चीन के शैनशी प्रांत के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ता है।
इस लाइन के शुरू होने से पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी और यात्रा में लगने वाला समय भी कम हो सकता है। बेहतर रेल संपर्क का असर स्थानीय पर्यटन कारोबार पर पड़ने की उम्मीद है। होटल, रेस्तरां, स्थानीय परिवहन और पर्यटन से जुड़े दूसरे व्यवसायों को भी इससे फायदा मिल सकता है।
यीछांग-शिंगशान लाइन से मध्य और दक्षिण-पश्चिमी चीन को जोड़ने की तैयारी
तीसरी परियोजना यीछांग-शिंगशान हाई स्पीड रेलवे लाइन है। इसकी लंबाई 101 किलोमीटर है। यह लाइन मध्य चीन और दक्षिण-पश्चिमी चीन के बीच रेल संपर्क को मजबूत करेगी।
चीन के विशाल भौगोलिक क्षेत्र में अलग-अलग आर्थिक क्षेत्रों को तेज रेल नेटवर्क से जोड़ना उसकी परिवहन नीति का अहम हिस्सा रहा है। इस नई लाइन से यात्रियों की आवाजाही के साथ क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और आपसी संपर्क को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हारपिन-यीछुन बनी चीन की सबसे उत्तरी हाई स्पीड रेल लाइन
चारों परियोजनाओं में हारपिन-यीछुन हाई स्पीड रेलवे सबसे खास है। इसकी लंबाई 318 किलोमीटर है। संचालन शुरू होने के साथ यह चीन की सबसे उत्तरी हाई स्पीड रेलवे लाइन बन गई है। यह उत्तर-पूर्वी चीन में रेल संपर्क को मजबूत करते हुए हारपिन को यीछुन से जोड़ेगी।
इस लाइन पर ट्रेनों की अधिकतम परिचालन गति 250 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। उत्तर-पूर्वी चीन के ठंडे मौसम वाले क्षेत्र में हाई स्पीड रेल सेवा शुरू होना परिवहन और इंजीनियरिंग, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण है।
तीन लाइनों पर 350 KM/H की रफ्तार, एक पर 250 KM/H
चारों नई हाई स्पीड रेल लाइनों पर ट्रेनों की परिचालन गति एक जैसी नहीं होगी। हारपिन-यीछुन लाइन पर ट्रेनें अधिकतम 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। वहीं बाकी तीन लाइनों पर अधिकतम परिचालन गति 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार लंबी दूरी के शहरों के बीच यात्रा का समय घटाने में अहम भूमिका निभाती है। चीन के हाई स्पीड रेल नेटवर्क में इस स्तर की गति पहले से ही उसकी तेज रेल परिवहन क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एक साथ 4 लाइनें शुरू करने के पीछे क्या है चीन का प्लान?
चार नई रेलवे लाइनों का एक ही दिन संचालन शुरू होना चीन के हाई स्पीड रेल नेटवर्क के लगातार विस्तार की दिशा में एक और कदम है। इन परियोजनाओं के जरिए देश के अलग-अलग भौगोलिक और आर्थिक क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क को मजबूत किया गया है।
चीन लंबे समय से बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों और अपेक्षाकृत दूरदराज के इलाकों को भी हाई स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने पर जोर देता रहा है। नई लाइनों से यात्रियों को तेज परिवहन सुविधा मिलने के साथ क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन और शहरों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यही वजह है कि इन परियोजनाओं को सिर्फ रेल संपर्क बढ़ाने के बजाय व्यापक क्षेत्रीय विकास की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।