लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। पार्टी के पास मौजूदा विधायक संख्या के आधार पर दो उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति है, लेकिन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव तीसरा उम्मीदवार उतारने का संकेत दे चुके हैं। सोमवार को सपा विधायक दल की बैठक में राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हुई। रामगोपाल यादव की उम्मीदवारी लगभग तय मानी जा रही है, जबकि बाकी नामों में पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन, सलीम इकबाल शेरवानी और कुछ दलित नेताओं के नाम चर्चा में हैं।
बैठक में अखिलेश यादव ने विधायकों से संभावित उम्मीदवारों के नामों पर राय ली। रामगोपाल यादव के नाम पर सबसे पहले चर्चा हुई और उन्हें एक बार फिर राज्यसभा भेजे जाने की संभावना जताई गई। वहीं अन्य नामों को लेकर विधायकों से सुझाव लिए गए। अखिलेश यादव से जब उम्मीदवारों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मंगलवार को नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी। हालांकि उन्होंने यह संकेत जरूर दिया कि पार्टी तीन उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है।
10 सीटों पर होना है चुनाव, सपा के सामने तीसरे उम्मीदवार की चुनौती
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें आठ सीटें भाजपा, एक बसपा और एक सपा की है। बसपा के पास फिलहाल इतनी सदस्य संख्या नहीं है कि वह अपनी सीट बरकरार रख सके। सपा की मौजूदा संख्या के आधार पर उसके दो उम्मीदवारों के आसानी से निर्वाचित होने की स्थिति बताई जा रही है।
सपा विधायक दल की बैठक में रामगोपाल यादव को दोबारा उम्मीदवार बनाए जाने की बात लगभग तय मानी गई। इसके अलावा आलोक रंजन और सलीम इकबाल शेरवानी के नाम पर चर्चा हुई। कुछ विधायकों ने पीडीए को प्राथमिकता देने का सुझाव भी दिया।
आलोक रंजन के नाम को लेकर बैठक में यह बात भी सामने आई कि पार्टी की ओर से उनसे पहले किए गए वादे को पूरा किया जाना चाहिए। सपा अध्यक्ष ने कथित तौर पर बैठक में कहा कि तीसरे उम्मीदवार का नाम काफी चर्चित होगा।
आलोक रंजन की दावेदारी क्यों मानी जा रही मजबूत?
आलोक रंजन को सपा ने फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में भी उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उस समय उनकी उम्मीदवारी सफल नहीं हो सकी थी। इस वजह से इस बार भी उनके नाम को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा है।
वहीं तीसरे उम्मीदवार के तौर पर सलीम इकबाल शेरवानी का नाम भी सामने आया है। शेरवानी बदायूं से पांच बार सांसद रह चुके हैं और मुस्लिम समाज के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। वर्ष 2009 में बदायूं से धर्मेंद्र यादव को टिकट दिए जाने के बाद वह सपा से नाराज होकर कांग्रेस में चले गए थे, लेकिन चुनाव हार गए थे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बदायूं में सपा उम्मीदवार के पक्ष में काम किया था। इसके बाद अब उनके नाम को राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर चर्चा में रखा जा रहा है।
सपा के पास तीसरे उम्मीदवार के लिए कितने वोट?
सदस्य संख्या के लिहाज से सपा दो राज्यसभा सीटें आसानी से जीत सकती है। मौजूदा समय में सपा के विधायकों की सूची में 101 नाम बताए जा रहे हैं। इनमें छह ऐसे विधायक हैं, जिन्होंने पिछले राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत की थी। इस आधार पर पार्टी के पास 95 विधायक रह जाते हैं।
महाराजी प्रजापति के साथ आने पर यह संख्या 96 और पल्लवी पटेल के समर्थन की स्थिति में 97 हो सकती है। इंडिया गठबंधन के दो कांग्रेस विधायकों को जोड़ने पर संख्या 99 तक पहुंचती है। इसके अलावा सुभासपा के दो विधायकों के सपा के साथ होने की बात कही जा रही है। इन्हें शामिल करने पर संख्या 101 बताई जा रही है।
सपा के पक्ष में तीन अन्य विधायकों के समर्थन की भी चर्चा है, जिन्होंने क्रॉस वोटिंग की स्थिति में पार्टी का साथ देने का वादा किया है। अगर ये विधायक भी साथ आते हैं तो सपा समर्थक संख्या 104 तक पहुंच सकती है।
एक सीट के लिए 37 वोट, तीसरे उम्मीदवार पर टिकी नजर
राज्यसभा चुनाव के मौजूदा गणित के मुताबिक एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 विधायकों के वोट की जरूरत होगी। दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए 74 वोट पर्याप्त होंगे। इस गणित के बाद सपा के पास करीब 30 विधायक अतिरिक्त बचने की बात कही जा रही है।
इसी वजह से पार्टी के तीसरा उम्मीदवार उतारने की संभावना पर चर्चा तेज है। हालांकि तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए अतिरिक्त वोटों का समर्थन जरूरी होगा। ऐसे में चुनाव में क्रॉस वोटिंग की स्थिति भी बन सकती है। अब मंगलवार को नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद सपा की रणनीति और उम्मीदवारों को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।