नई दिल्ली: फैटी लिवर की समस्या अब सिर्फ वयस्कों तक सीमित नहीं रह गई है। कम उम्र के बच्चों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतें और शारीरिक गतिविधियों में कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर और एचओडी डॉ. रमेश गर्ग ने बताया कि बच्चों में फैटी लिवर का जोखिम किन वजहों से बढ़ सकता है और इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है।
डॉ. रमेश गर्ग के मुताबिक, बच्चों में फैटी लिवर का एक प्रमुख कारण अधिक वजन और मोटापा है। जब बच्चे लगातार जरूरत से ज्यादा कैलोरी, चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन करते हैं और उनकी शारीरिक गतिविधियां कम रहती हैं, तो शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने लगती है। इसका असर लिवर पर भी पड़ सकता है और उसकी कोशिकाओं में फैट जमा हो सकता है।
जंक फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय पदार्थ, कोल्ड ड्रिंक्स और ज्यादा चीनी वाली चीजों का अधिक सेवन इस समस्या का खतरा बढ़ा सकता है। बार-बार बाहर का खाना खाना भी इसकी एक वजह हो सकता है।
इसके अलावा, मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम पर ज्यादा समय बिताने से बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है। ऐसे में खेलकूद और बाहर की गतिविधियों के लिए समय कम हो जाता है। कुछ बच्चों में आनुवंशिक कारण भी फैटी लिवर की समस्या से जुड़े हो सकते हैं।
शुरुआती चरण में फैटी लिवर के अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कुछ बच्चों को थकान महसूस हो सकती है या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्की परेशानी हो सकती है। वजन बढ़ना भी देखने को मिल सकता है।
हालांकि, केवल इन लक्षणों के आधार पर फैटी लिवर की पहचान करना मुश्किल है। यह भी जरूरी नहीं कि हर अधिक वजन वाले बच्चे को फैटी लिवर हो या फैटी लिवर से पीड़ित हर बच्चा मोटा ही हो।
फिर भी, ज्यादा वजन, पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी और असंतुलित खान-पान वाले बच्चों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है।
बच्चों की दिनचर्या और खान-पान में कुछ बदलाव करके फैटी लिवर का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए जरूरी है कि उन्हें संतुलित और घर का बना खाना दिया जाए। मीठे और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना चाहिए।
बच्चों को रोजाना शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना और मोबाइल, टीवी व वीडियो गेम पर बिताया जाने वाला समय कम करना भी जरूरी है।
यदि बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा है या डॉक्टर को फैटी लिवर का संदेह है, तो समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। शुरुआती चरण में जीवनशैली में उचित बदलाव से लिवर में जमा अतिरिक्त फैट को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
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