नई दिल्ली: बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस उस वक्त अचानक हंगामे में बदल गई, जब एक युवक ने उन पर कथित तौर पर जूता फेंक दिया। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों ने तुरंत उसे पकड़ लिया। इसके बाद उसकी तलाशी के दौरान चाकू मिलने का दावा भी सामने आया, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है।
कौन है पप्पू यादव पर हमला करने का आरोपी?
पुलिस के मुताबिक पकड़े गए युवक की पहचान 34 वर्षीय सुमित के रूप में हुई है। वह उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का रहने वाला है और वर्तमान में गाजियाबाद में रहकर लोहे का काम करता है। शुरुआती जांच में उसके खिलाफ किसी पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं मिली है। पुलिस उसकी पृष्ठभूमि और कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
जूता फेंकते ही मच गई अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुमित ने अचानक पप्पू यादव की ओर जूता फेंक दिया। घटना होते ही वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी और समर्थक सक्रिय हो गए और कुछ ही क्षणों में उसे पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया गया। घटना के चलते कार्यक्रम स्थल पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
चाकू मिलने के दावे ने बढ़ाई गंभीरता
मामले में सबसे गंभीर पहलू आरोपी के पास से कथित तौर पर चाकू मिलने का है। पुलिस का कहना है कि जब समर्थकों ने सुमित को उनके हवाले किया, तब उसके साथ एक चाकू भी सौंपा गया। हालांकि जांच एजेंसियां अभी यह पुष्टि करने में जुटी हैं कि युवक वास्तव में चाकू लेकर कार्यक्रम में आया था या नहीं। इस दावे की हर पहलू से जांच की जा रही है।
पूछताछ में बताई नाराजगी की वजह
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह संतों के अपमान को लेकर नाराज था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने यह कदम अकेले उठाया या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की कोई भूमिका है।
सीसीटीवी और गवाहों के आधार पर जांच जारी
पुलिस आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है। साथ ही घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह केवल विरोध जताने की घटना थी या इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका है।