पश्चिम बंगाल की सियासत के लिए आज ‘सुपर वेडनेसडे’ है। 142 विधानसभा सीटों पर हो रही वोटिंग राज्य की अगली सरकार का भविष्य तय करेगी। एक तरफ जहां अमित शाह और बीजेपी बंगाल में पहली बार ‘कमल’ खिलाने का दावा कर रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मतदान केंद्रों पर लगी लंबी कतारों के बीच राज्य की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी (TMC) और चुनाव आयोग के बीच ‘सुरक्षा’ को लेकर आर-पार की जंग छिड़ गई है। सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम किए गए हैं कि टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने तंज कसते हुए इसे युद्ध जैसी स्थिति करार दे दिया है।
सुरक्षा बलों की भारी तैनाती पर भड़कते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा, “बंगाल में अब बस राफेल जेट और आईएनएस वॉरशिप तैनात करना ही बाकी रह गया है। जितनी फोर्स पाकिस्तान और बांग्लादेश के बॉर्डर पर होनी चाहिए, उतनी बंगाल के लोगों के खिलाफ उतार दी गई है।” बनर्जी ने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चुनौती देते हुए कहा कि आप जितनी चाहें फोर्स उतार लें, टीएमसी 2021 से भी बड़ी जीत दर्ज करेगी।
दूसरे चरण की सबसे हॉट सीट भवानीपुर है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी से है। ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग और पर्यवेक्षकों पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बल आतंकवाद फैला रहे हैं और बीजेपी के इशारे पर टीएमसी के पोस्टर हटाए जा रहे हैं।
| मुख्य आंकड़े | विवरण |
| कुल विधानसभा सीटें | 142 |
| सुरक्षा बल | 2,321 कंपनियां (7 जिलों में तैनात) |
| पर्यवेक्षक (Observers) | 142 सामान्य, 95 पुलिस, 100 व्यय पर्यवेक्षक |
| कुल मतदाता | 3.21 करोड़ (1.57 करोड़ महिलाएं) |
| निगरानी तकनीक | ड्रोन और सीसीटीवी |
बता दें कि पहले चरण (23 अप्रैल) में बंगाल ने 93.19% मतदान कर नया इतिहास रचा था। दूसरे चरण में भी 41,001 पोलिंग बूथों पर सुबह से ही जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। कोलकाता में सबसे ज्यादा 273 सुरक्षा कंपनियां तैनात की गई हैं।
इन 142 सीटों पर टीएमसी का दबदबा रहा है। 2021 के चुनाव में टीएमसी ने इनमें से 123 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को केवल 18 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। इस बार बीजेपी अपनी पैठ बढ़ाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, वहीं ममता बनर्जी अपना किला बचाने के लिए मैदान में हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि सुरक्षा के ये पुख्ता इंतजाम निष्पक्ष और हिंसा मुक्त मतदान सुनिश्चित करने के लिए हैं। अब देखना होगा कि सुरक्षा बलों के साये में हो रही यह वोटिंग किसके पक्ष में जाती है।
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