विश्वकर्मा पूजा (17 सितंबर 2026) के पावन अवसर पर यदि आप अपने व्यापार और कारोबार में दोगुनी तरक्की चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताए गए कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद फलदायी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, कन्या संक्रांति के दिन सही विधि-विधान से की गई पूजा व्यापार की सभी बाधाओं को दूर कर उन्नति के नए मार्ग खोलती है।
यदि आप भी अपनी दुकान, फैक्ट्री या वर्कशॉप में पूरे साल बंपर बिक्री और मुनाफा चाहते हैं, तो पूजा के दौरान इन 3 मुख्य बातों का विशेष ध्यान रखें:
- 1. सफाई के बाद चौकी स्थापना और गणेश जी का पूजन: सुबह स्नान के बाद कार्यस्थल की अच्छे से सफाई करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा और श्री गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। रिद्धि-सिद्धि के दाता गणेश जी और शिल्प के देवता विश्वकर्मा जी की एक साथ स्थापना से व्यापारिक स्थल का वातावरण पवित्र होता है और सुख-समृद्धि का वास होता है।
- 2. औजारों-मशीनों का पूजन और विश्राम: कारोबार में इस्तेमाल होने वाले सभी औजारों, मशीनों, कंप्यूटरों और वाहनों पर रोली-चंदन से तिलक लगाकर कलावा बांधें। ध्यान रखें कि इस दिन मशीनों से काम नहीं लिया जाता और उन्हें विश्राम दिया जाता है। यंत्रों के प्रति यह आदर भाव मशीनों में आने वाली बार-बार की खराबी को रोकता है।
- 3. कथा, आरती और बूंदी का भोग: धूप-दीप जलाकर विश्वकर्मा पूजा की कथा पढ़ें और आरती करें। भगवान को बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। पूजा संपन्न होने के बाद इस प्रसाद को कर्मचारियों, ग्राहकों और आसपास के लोगों में जरूर बांटें।
शास्त्रों के अनुसार, 17 सितंबर को किए गए ये सरल कार्य दुकान में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ाते हैं और धन की कमी को दूर कर व्यापार को ऊंचाइयों पर ले जाते हैं।