नई दिल्ली: इटली में हिंसक विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार, 24 अक्टूबर की शाम रोम, मिलान, ट्यूरिन, बोलोग्ना और फ्लोरेंस समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की खबरें सामने आईं। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कई जगह आगजनी और तोड़फोड़ हुई, जबकि मिलान में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों पर लूटपाट करने के आरोप लगे। बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और सैन्य खर्च में बढ़ोतरी के खिलाफ हो रहे इन प्रदर्शनों के बीच सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
रोम से ट्यूरिन तक कैसे बिगड़े हालात?
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी रोम के पियाजा डेला रिपब्लिका में बड़ी संख्या में लोगों ने सरकार के खिलाफ मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कुछ प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसके बाद भी तनाव बना रहा और कई जगह तोड़फोड़ की खबरें सामने आईं।
ट्यूरिन में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। यहां विरोध की प्रमुख वजहों में बढ़ता सैन्य खर्च और ईंधन की कीमतों में इजाफा शामिल बताया गया। शाम होते-होते शहर के मध्य हिस्से में माहौल तनावपूर्ण हो गया। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पटाखे और बोतलें फेंकीं, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी।
मिलान में भी हालात हिंसक होने की खबरें आईं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, नकाब पहने कुछ प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की। हालांकि, घटनाओं में हुए कुल नुकसान और गिरफ्तारियों के बारे में उपलब्ध रिपोर्ट में विस्तृत आंकड़े नहीं दिए गए हैं।
महंगाई और सैन्य खर्च के खिलाफ क्यों हो रहा प्रदर्शन?
इटली में हालिया प्रदर्शनों के पीछे बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और रक्षा खर्च में बढ़ोतरी को लेकर असंतोष बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारी सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं। कई शहरों में रैलियों के दौरान तनाव बढ़ने से पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
बोलोग्ना में भी कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की खबर है। अलग-अलग शहरों में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हिंसा रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए?
लगातार हिंसक घटनाओं के बीच इटली सरकार ने कानून को सख्त करने के कदम उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों को पांच साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा, सार्वजनिक या निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई भी जिम्मेदार लोगों से वसूलने का प्रावधान बताया गया है।
हिंसा में शामिल नाबालिगों के मामलों में उनके माता-पिता से भी आर्थिक नुकसान की भरपाई कराने की बात कही गई है। हालांकि, किसी मामले में कार्रवाई का स्वरूप संबंधित कानून और जांच के तथ्यों पर निर्भर करेगा।
इससे पहले मिलान में ब्रांडेड शोरूम को निशाना बनाए जाने और लूटपाट की घटनाओं के बाद गृह मंत्री माटेओ पियान्टेदोसी ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का आदेश दिया था। खास तौर पर उन बड़े शहरों में सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दिया गया, जहां बड़े पैमाने पर रैलियां होने की आशंका थी।
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने क्या कहा?
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले लोगों के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
मेलोनी के मुताबिक, सुरक्षा की गारंटी उन लोगों को भी मिलनी चाहिए जो काम पर जा रहे हैं और उन नागरिकों को भी, जो अपने शहरों में बिना किसी डर के रहना चाहते हैं। उन्होंने साफ कहा कि टकराव और हिंसा फैलाने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसा के बीच बढ़ी चुनौती
इटली में ताजा घटनाओं ने सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर महंगाई और रक्षा खर्च जैसे मुद्दों पर लोगों का गुस्सा सामने आ रहा है, तो दूसरी ओर प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ रोकना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
प्रधानमंत्री मेलोनी ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और आम लोगों की सुरक्षा, दोनों को अहम बताया है। अब नजर इस बात पर है कि अतिरिक्त सुरक्षा इंतजामों और सख्त कानूनों के बाद देश के प्रमुख शहरों में तनाव कम होता है या प्रदर्शन आगे भी जारी रहते हैं।