बागपत: दीपावली से पहले उत्तर प्रदेश के कई शहरों में वायु प्रदूषण चिंता बढ़ाने लगा है। बागपत जिले के बड़ौत में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के शनिवार शाम चार बजे जारी आंकड़ों के मुताबिक, बड़ौत का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 324 रहा, जो उस समय देश के 268 प्रमुख शहरों में सबसे अधिक था। मेरठ 321 AQI के साथ दूसरे और गजरौला 309 AQI के साथ तीसरे स्थान पर रहा। बागपत शहर का AQI भी 278 दर्ज किया गया। बढ़ते प्रदूषण के बीच सांस और आंखों से जुड़ी परेशानियों को लेकर चिंता बढ़ रही है।
बड़ौत से मेरठ तक हवा की गुणवत्ता खराब
शनिवार को जारी आंकड़ों में बड़ौत का AQI 324 दर्ज किया गया। मेरठ में यह 321 और गजरौला में 309 रहा। वहीं, बागपत शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 278 तक पहुंच गया।
वायु गुणवत्ता सूचकांक के इन स्तरों पर हवा स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकती है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ौत और बागपत में PM2.5 और PM10 कणों का स्तर बढ़ने से लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पतालों में मरीज बढ़ने का दावा
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और निजी अस्पतालों में सांस की दिक्कत, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत बढ़ी।
प्रदूषित हवा में मौजूद बारीक कण श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इससे खांसी, गले में जलन, सांस फूलने और आंखों में परेशानी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, अस्पतालों में मरीजों की संख्या में बताई गई बढ़ोतरी के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
पराली, धूल और फैक्ट्रियों के धुएं पर उठे सवाल
रिपोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण के इंतजामों पर भी सवाल उठाए गए हैं। पराली और फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर समितियां गठित हैं, लेकिन इनके कामकाज को लेकर शिकायतें सामने आई हैं।
इसके अलावा, धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव पर्याप्त रूप से होता नजर नहीं आने का दावा किया गया है। क्षेत्र में 50 से ज्यादा कोल्हुओं और 200 से अधिक फैक्ट्रियों में से कुछ की चिमनियों से धुआं निकलने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
मिट्टी के खनन और परिवहन के साथ बिना ढके निर्माण सामग्री या धूल ले जाने वाले वाहनों की आवाजाही भी जारी रहने का उल्लेख है। इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण प्रदूषण कम करने के प्रयासों का अहम हिस्सा हो सकता है।
GRAP-1 लागू, फिर भी प्रदूषण पर चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषण के बीच ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू था। इसके बावजूद बड़ौत और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब बनी रही।
ऐसे हालात में धूल पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन की निगरानी और फसल अवशेष जलाने पर रोक जैसे उपाय महत्वपूर्ण हो जाते हैं। स्थानीय रिपोर्ट में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण अभियंता से संपर्क करने की कोशिश का भी जिक्र है, लेकिन फोन कॉल का जवाब नहीं मिलने की बात कही गई है।
प्रदूषित हवा से किन बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है?
चिकित्सकों के मुताबिक, प्रदूषित हवा सांस की नली में सूजन और सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकती है। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से हृदय और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है। रिपोर्ट में हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर, पैरालिसिस और ब्रेन हैमरेज जैसी गंभीर स्थितियों के खतरे का भी उल्लेख किया गया है।
बागपत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत ने लोगों को मास्क इस्तेमाल करने की सलाह दी है। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को सुबह की सैर से बचने और घरों की खिड़कियां-दरवाजे बंद रखने की सलाह दी।
खराब हवा में कैसे रखें अपना बचाव?
प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर कुछ सावधानियां परेशानी कम करने में मदद कर सकती हैं:
- बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला N95 या समकक्ष मास्क इस्तेमाल करें।
- बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को प्रदूषण अधिक होने पर बाहर की गतिविधियों से बचाएं।
- सुबह की सैर और खुले में व्यायाम करने से पहले स्थानीय AQI की स्थिति जांचें।
- घर में धूल और धुएं के प्रवेश को कम करने की कोशिश करें।
- सांस लेने में ज्यादा परेशानी, सीने में दर्द या अचानक गंभीर लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
बड़ौत, मेरठ और गजरौला में दर्ज खराब AQI ने दीपावली से पहले वायु प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की प्रभावशीलता और स्थानीय स्तर पर निगरानी कितनी मजबूत होती है, यह अहम रहेगा।