बलिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लिए बुधवार रात एक बेहद दुखद खबर सामने आई। पूर्वांचल में बसपा के सबसे मजबूत स्तंभ और रसड़ा (बलिया) सीट से लगातार तीन बार के विधायक उमाशंकर सिंह का निधन हो गया है। वे बीते दो वर्षों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और दिल्ली के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
उमाशंकर सिंह के चले जाने से न केवल रसड़ा और पूरे बलिया जिले में शोक की लहर दौड़ गई है, बल्कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी का प्रतिनिधित्व भी पूरी तरह खत्म (शून्य) हो गया है।
भाजपा की प्रचंड लहर में भी बचाया था बसपा का किला
साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा की प्रचंड लहर के आगे पूरी बीएसपी का सूपड़ा साफ हो गया था, वहीं उमाशंकर सिंह ने अपनी रसड़ा सीट पर जीत दर्ज कर बसपा का झंडा बुलंद रखा था। वे 2022 से यूपी विधानसभा में बीएसपी के इकलौते विधायक के रूप में पार्टी की आवाज बुलंद कर रहे थे। उनके निधन के साथ ही अब 403 सदस्यों वाली यूपी विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी का कोई भी प्रतिनिधि नहीं बचा है।
छात्र संघ राजनीति से जिला पंचायत अध्यक्ष और 3 बार के MLA तक का सफर
2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के खनवर गांव (नगरा ब्लॉक) में एक किसान परिवार में जन्मे उमाशंकर सिंह का राजनीतिक सफर काफी संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रहा:
- शुरुआती सफर: अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल से पूरी करने के बाद उन्होंने कॉलेज के दिनों में छात्र संघ राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की।
- जिला पंचायत अध्यक्ष: वर्ष 2000 में वे जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते और बाद में जिला पंचायत अध्यक्ष बने।
- विधायक के रूप में हैट्रिक: वर्ष 2012 में वे पहली बार बसपा के टिकट पर रसड़ा से विधायक चुने गए। इसके बाद 2017 और 2022 के चुनावों में भी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने लगातार जीत की हैट्रिक लगाई।
बीमारी से लंबी लड़ाई के बाद ली अंतिम सांस
उमाशंकर सिंह पिछले दो सालों से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का सामना कर रहे थे। फरवरी 2026 में भी उनके स्वास्थ्य में गिरावट को लेकर खबरें सामने आई थीं। बुधवार रात उनके निधन की पुष्टि होते ही रसड़ा विधानसभा क्षेत्र में उनके समर्थकों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता के बीच गहरा शोक छा गया।
पूर्वांचल की राजनीति में बसपा के सबसे बड़े रणनीतिकार और जनता के बीच लोकप्रिय नेता के रूप में उमाशंकर सिंह का योगदान हमेशा याद किया जाएगा।