वॉशिंगटन: अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन से आने वाले सामान पर 7.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी में हैं। हालांकि, इसका आधिकारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है। अगर यह टैरिफ लागू होता है तो चीन से आयात होने वाले सामान पर अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 20 फीसदी तक पहुंच सकता है।
अमेरिका का आरोप है कि चीन अपनी जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता के कारण बड़ी मात्रा में सस्ते सामान का निर्यात कर रहा है। इससे दुनियाभर के बाजारों में कीमतों पर दबाव बढ़ता है और स्थानीय निर्माताओं को नुकसान उठाना पड़ता है। अमेरिकी प्रशासन इसी अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को लेकर चीन पर नया शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है।
चीन की ओवरकैपेसिटी बनी अमेरिका की चिंता
चीन का विनिर्माण क्षेत्र उसकी अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल है। उन्नत तकनीक, सस्ता कच्चा माल, कम श्रम लागत और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता ने चीनी कंपनियों को कम कीमत पर सामान बनाने में सक्षम बनाया है। अमेरिका का कहना है कि चीन की जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता के कारण उसके उत्पाद वैश्विक बाजार में बड़ी मात्रा में पहुंच रहे हैं।
अमेरिका ने मार्च 2026 में चीन समेत 60 से अधिक देशों की जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता और जबरन मजदूरी से जुड़े मामलों की जांच शुरू की थी। इसी प्रक्रिया के तहत चीन की कई औद्योगिक इकाइयों में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को लेकर सवाल उठाए गए।
धारा 301 के तहत जांच में क्या सामने आया?
अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत हुई जांच में पाया गया कि चीन की कई इंडस्ट्रीज में जरूरत से अधिक उत्पादन हो रहा है। अमेरिका के मुताबिक, इस अतिरिक्त उत्पादन के कारण वैश्विक बाजार में सस्ते चीनी सामान की आपूर्ति बढ़ रही है, जिससे अमेरिकी निर्माताओं पर दबाव पड़ता है।
अमेरिका की चिंता सिर्फ चीन की ओवरकैपेसिटी तक सीमित नहीं है। चीन का व्यापार सरप्लस भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। घरेलू मांग में सुस्ती के बीच चीनी कंपनियां विदेशी बाजारों में अधिक सामान बेच रही हैं। इससे चीन का निर्यात बढ़कर 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिसे अमेरिका अपने लिए बड़ी चिंता के तौर पर देख रहा है।
ट्रंप के नए टैरिफ से कितना बढ़ेगा शुल्क?
इसी पृष्ठभूमि में डोनाल्ड ट्रंप अपने संरक्षणवादी व्यापार एजेंडे के तहत चीन पर 7.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द कर चुका है। इसके बाद अमेरिका ने दुनिया की करीब 60 अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले सामान पर 10 से 12.5 फीसदी तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया था।
अगर चीन पर प्रस्तावित अतिरिक्त 7.5 फीसदी टैरिफ लागू होता है तो चीनी सामान पर अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 20 फीसदी तक पहुंच जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव फिर गहरा सकता है।
ट्रंप-शी की मुलाकात से पहले टैरिफ का ऐलान क्यों अहम?
प्रस्तावित टैरिफ की टाइमिंग भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सितंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शिखर बैठक होने वाली है। ऐसे में बैठक से ठीक पहले चीन के सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल सकता है।
अगर ट्रंप प्रशासन टैरिफ का आधिकारिक ऐलान कर देता है, तो इससे अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध की आशंका फिर बढ़ सकती है। साथ ही, सितंबर में होने वाली ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से पहले दोनों देशों के बीच बातचीत का माहौल भी प्रभावित होने की संभावना है।