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दलाई लामा की कहानी पर बनी फिल्म से क्यों घबराया चीन? रिलीज से पहले ‘4 रिवर्स 6 रेंजेस’ पर बीजिंग ने खोला मोर्चा

vineet verma
Last updated: August 25, 2026 9:47 am
vineet verma
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नई दिल्ली: 11 सितंबर को भारत के सिनेमाघरों में एक ऐसी फिल्म रिलीज होने जा रही है, जिसने रिलीज से पहले ही चीन की नाराजगी बढ़ा दी है। फिल्म का नाम ‘4 रिवर्स 6 रेंजेस’ है। यह ऐतिहासिक ड्रामा 1959 के उस दौर की कहानी पर आधारित है, जब 14वें दलाई लामा तिब्बत से निकलकर भारत पहुंचे थे। फिल्म में तिब्बती स्वतंत्रता सेनानियों के गुप्त प्रतिरोध संगठन ‘चुशी गंगड्रुक’ की भूमिका और उस कठिन सफर को दिखाया गया है।

Contents
चीन ने फिल्म को बताया प्रोपेगैंडातिब्बत के इतिहास को लेकर चीन का क्या दावा है?डायरेक्टर बोले- नफरत फैलाना मकसद नहींदार्जिलिंग और कलिम्पोंग से है खास रिश्तारोटरडैम फिल्म फेस्टिवल में भी हुआ था प्रदर्शन

फिल्म की कहानी का गहरा संबंध दार्जिलिंग और कलिम्पोंग के पहाड़ी इलाकों से है। इसका निर्देशन दार्जिलिंग में जन्मे तिब्बती फिल्म निर्देशक शैंपेन खिमसर ने किया है। फिल्म रिलीज से पहले भारतीय दर्शकों के बीच भी इसे लेकर उत्सुकता है, लेकिन चीन के सरकारी मीडिया ने इस फिल्म के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है और इसे इतिहास की मनगढ़ंत कहानी करार दिया है।

चीन ने फिल्म को बताया प्रोपेगैंडा

चीन के सरकारी मीडिया समूह के प्रमुख चैनल सीजीटीएन ने फिल्म को लेकर विस्तृत लेख प्रकाशित किया है। इसमें फिल्मकार शैंपेन खिमसर पर तिब्बत के इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया गया है।

चीनी मीडिया का दावा है कि फिल्मकार ने सोशल मीडिया पर तिब्बत को चीन से अलग दिखाने वाली गलत जानकारी साझा की। बीजिंग का कहना है कि तिब्बत सदियों से चीन का हिस्सा रहा है और इस तरह की फिल्में अलगाववादी विचारों को बढ़ावा देने की कोशिश हैं।

चीन लगातार यह भी दावा करता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिब्बत की निर्वासित सरकार को कोई कानूनी मान्यता हासिल नहीं है। बीजिंग का तर्क है कि 1951 और 1959 से जुड़ी घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश की जाने वाली कई धारणाएं वास्तविक इतिहास से अलग हैं।

तिब्बत के इतिहास को लेकर चीन का क्या दावा है?

चीन का कहना है कि भाषा, इतिहास और कानूनी आधार के लिहाज से तिब्बत हमेशा से चीन का हिस्सा रहा है। इसी आधार पर वह दलाई लामा और तिब्बत से जुड़े स्वतंत्रता के दावों को खारिज करता रहा है।

दूसरी ओर, तिब्बत के राजनीतिक इतिहास, वहां के लोगों के संघर्ष और दलाई लामा के भारत आने की घटनाओं को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक दृष्टिकोण मौजूद हैं। ऐसे में ‘4 रिवर्स 6 रेंजेस’ की कहानी भी इसी संवेदनशील इतिहास के एक दौर को केंद्र में रखती है।

फिल्म को लेकर चीन की तीखी प्रतिक्रिया को इसी व्यापक तिब्बत विवाद के संदर्भ में देखा जा रहा है। दलाई लामा और तिब्बत से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बीजिंग लंबे समय से बेहद संवेदनशील रुख अपनाता रहा है।

डायरेक्टर बोले- नफरत फैलाना मकसद नहीं

चीन की ओर से लगाए गए आरोपों पर फिल्म के निर्देशक शैंपेन खिमसर ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि फिल्म किसी के खिलाफ नफरत या विभाजन की भावना पैदा करने के लिए नहीं बनाई गई है।

उनके मुताबिक, यह फिल्म पुराने घावों, बलिदानों और संघर्ष की उन कहानियों को सामने लाने की कोशिश है, जिन्हें याद किया जाना जरूरी है। फिल्म में तिब्बती लोगों के संघर्ष, दलाई लामा की रक्षा करने वालों के बलिदान और उनके अस्तित्व की लड़ाई को दर्ज करने की कोशिश की गई है।

शैंपेन खिमसर खुद दार्जिलिंग में शरणार्थी के तौर पर पले-बढ़े हैं। उन्होंने इस फिल्म को तैयार करने और बड़े पर्दे तक पहुंचाने में करीब 12 साल लगाए हैं।

दार्जिलिंग और कलिम्पोंग से है खास रिश्ता

‘4 रिवर्स 6 रेंजेस’ की कहानी ही नहीं, बल्कि इसके निर्माण से जुड़े कई लोगों का भी दार्जिलिंग और कलिम्पोंग से गहरा संबंध है। फिल्म के निर्माता दोरजी वांग्दी देवात्शांग और मुख्य अभिनेता थुप्तेन चुकात्सांग ने कलिम्पोंग के सेंट ऑगस्टीन स्कूल से शुरुआती शिक्षा हासिल की है।

फिल्म के हिंदी डब संस्करण में अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी आवाज दी है। पहाड़ों से जुड़े कलाकारों और फिल्मकारों की टीम के जरिए तिब्बती इतिहास और संघर्ष की कहानी को भारतीय दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।

रोटरडैम फिल्म फेस्टिवल में भी हुआ था प्रदर्शन

भारत में रिलीज से पहले ‘4 रिवर्स 6 रेंजेस’ को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रदर्शित किया जा चुका है। साल 2025 में नीदरलैंड के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल रोटरडैम में इसका प्रीमियर हुआ था।

उस समय भी चीनी मीडिया की ओर से फिल्म को लेकर विरोध दर्ज कराया गया था। वहीं अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और फिल्म समीक्षकों की ओर से इसकी कहानी को मानवीय दृष्टिकोण से संवेदनशील और साहसिक बताया गया था।

अब 11 सितंबर को फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। ऐसे में चीन की आपत्ति और फिल्म के विषय को लेकर भारतीय दर्शकों की बढ़ती दिलचस्पी के बीच इसकी रिलीज पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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