काठमांडू: नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद तबाही के साथ ऐसी कहानियां भी सामने आ रही हैं, जो किसी को भी भावुक कर दें। इन्हीं में से एक कहानी 8 साल के जोयल घले की है। बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा तो वह जान बचाने के लिए जंगल की तरफ भागा और एक पेड़ पर चढ़ गया। बाद में बचाव अभियान के दौरान उसे हेलीकॉप्टर से सुरक्षित निकाला गया। उसके पैर में फ्रैक्चर था और चेहरे पर भी चोट आई थी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
दूसरी तरफ उसकी 28 वर्षीय मां मट्टी माया तमांग अपने दोनों बेटों को ढूंढने के लिए राहत शिविरों और संग्रह केंद्रों के चक्कर लगा रही थीं। जिस वक्त बाढ़ आई, वह घर पर बुनाई का काम कर रही थीं। तभी अचानक उन्हें ऐसी तेज आवाज सुनाई दी, जो उन्हें भूकंप जैसी लगी। बाहर देखा तो पानी के साथ सबकुछ बहता नजर आया। उन्हें लगा कि उनके बच्चे भी सैलाब की चपेट में आ गए होंगे।
तमांग अपने बच्चों के स्कूल की तरफ निकल पड़ीं। सामान्य दिनों में कार से स्कूल पहुंचने में 15 से 20 मिनट लगते थे, लेकिन बाढ़ के बाद पूरा इलाका इस कदर बदल चुका था कि रास्ते पहचानना तक मुश्किल हो गया। स्कूल पूरी तरह तबाह हो चुका था। हर तरफ पानी, पत्थर और कीचड़ दिखाई दे रहा था।
तमांग ने राहत केंद्रों और उपलब्ध सूचियों में अपने बच्चों के बारे में जानकारी तलाशने की कोशिश की, लेकिन उन्हें दोनों बेटे कहीं नहीं मिले। लगातार नाकाम कोशिशों के बाद उन्होंने मान लिया कि शायद उनके दोनों बच्चों की बाढ़ में मौत हो गई है।
अस्पताल में बेटे का पता चला तो बदली मां की दुनिया
गुरुवार को तमांग को एक पत्रकार का फोन नंबर मिला। इस पत्रकार ने कुछ घंटे पहले नुवाकोट जिले के एक अस्पताल में जोयल घले से मुलाकात की थी। बच्चे को आगे के इलाज के लिए दूसरी जगह ले जाने से पहले पत्रकार ने उससे बात की और परिवार को खोजने के लिए उसका वीडियो बनाने की सहमति ली।
पत्रकार ने अस्पताल में अपना फोन नंबर छोड़ दिया। कुछ घंटे बाद तमांग ने उनसे संपर्क किया। जब उन्हें बताया गया कि उनका बेटा जिंदा है और उसे काठमांडू ले जाया गया है, तो तमांग को इस बात पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा था।
कई दिनों बाद अस्पताल में हुई मां-बेटे की मुलाकात
इस बीच तमांग को अपने छोटे बेटे के जिंदा होने की जानकारी भी मिल चुकी थी। शुक्रवार को वह काठमांडू के उस अस्पताल पहुंचीं, जहां जोयल को इलाज के लिए ले जाया गया था। उनका घर अस्पताल से करीब दो घंटे की दूरी पर है।
कई दिनों तक बेटे की तलाश करने के बाद जब तमांग उसके अस्पताल के बेड के पास पहुंचीं, तो वह कुछ देर चुपचाप वहीं खड़ी रहीं। जिस बेटे को वह बाढ़ में खो चुका मान बैठी थीं, उसे सामने जिंदा देखकर उनके लिए वह पल बेहद भावुक कर देने वाला था।
जोयल के पिता जापान में निर्माण मजदूर के तौर पर काम करते हैं। जानकारी के मुताबिक, वह भी अपने बेटे से मिलने के लिए यात्रा कर रहे थे।