चीफ जस्टिस बी.आर. गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस बी.आर. गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश कर चर्चा में आए वकील राकेश किशोर ने अब खुलकर अपना पक्ष रखा है. किशोर ने कहा कि अदालत में की गई कुछ टिप्पणियों ने उन्हें गहराई से आहत किया, खासकर उन मामलों में जो सनातन धर्म की आस्था से जुड़े थे. उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत में जब ऐसे मुद्दे उठते हैं, तो न्यायपालिका का रवैया उपेक्षापूर्ण नजर आता है.
अदालत के रवैये पर सवाल
किशोर ने बताया कि 16 सितंबर को दायर एक जनहित याचिका के दौरान सीजेआई की टिप्पणी—“मूर्ति से प्रार्थना करो की वोअपना सिर दोबारा बना ले”—ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आहत किया. उन्होंने कहा कि यदि अदालत राहत न भी दे, तो भी याचिकाकर्ता का सार्वजनिक अपमान नहीं होना चाहिए. साथ ही हल्द्वानी में रेलवे जमीन पर हुए कब्जे के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन साल से जारी स्टे पर भी सवाल उठाया.
नूपुर शर्मा और परंपरागत आयोजनों का जिक्र
किशोर ने पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा का मामला उठाते हुए कहा कि कुछ मुद्दों पर अदालत त्वरित कार्रवाई करती है, जबकि सनातन धर्म से जुड़े विषयों में संवेदनशीलता का अभाव दिखता है. उन्होंने जल्लीकट्टू और दहीहंडी जैसे आयोजनों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को परंपरागत गतिविधियों पर असर डालने वाला बताया.
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने मयूर विहार निवासी किशोर से तीन घंटे पूछताछ की, पर कोई औपचारिक शिकायत न होने पर उन्हें छोड़ दिया गया. सोमवार को हुई इस घटना में किशोर ने नारा लगाया— “सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान.”
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