भारतीय शेयर बाज़ार ने नए कारोबारी हफ्ते का आगाज़ ज़बरदस्त तेज़ी के साथ किया है। बाज़ार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स हरे निशान पर ट्रेड करने लगे, जिसने इन्वेस्टर्स के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। ग्लोबल मार्केट से मिले पॉज़िटिव सिग्नल्स और घरेलू स्तर पर शुरू हुई नई खरीदारी ने मार्केट में एक फ्रेश पॉजिटिविटी भर दी है।
क्रूड ऑयल का सस्ता होना बना गेम-चेंजर
मार्केट में आई इस तेज़ी का सबसे बड़ा ड्राइवर इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट है। भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है, इसलिए तेल के दाम घटने का सीधा फायदा हमारी इकोनॉमी और लिस्टेड कंपनियों की बैलेंस शीट पर दिखता है। मार्जिन्स सुधरने की उम्मीद में इन्वेस्टर्स का कॉन्फिडेंस एक बार फिर लौटता दिख रहा है।
इन्वेस्टर्स का सेंटीमेंट हुआ बूस्ट
ग्लोबल लेवल पर बने बेहतर माहौल से मार्केट में रिस्क लेने की क्षमता बढ़ी है। विदेशी (FIIs) और घरेलू (DIIs) दोनों तरह के संस्थागत निवेशकों ने बाज़ार में पैसा लगाना शुरू कर दिया है। इस खरीदारी का सीधा फायदा बैंकिंग, ऑटो और एनर्जी सेक्टर के स्टॉक्स को मिला, जहाँ अच्छी-खासी रैली देखने को मिली।
आगे बाज़ार का रुख कैसा रहेगा?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में बाज़ार की चाल कुछ बेहद अहम फैक्टर्स तय करेंगे:
क्रूड ऑयल की आगे की चाल, FIIs की इनफ्लो-आउटफ्लो (विदेशी निवेशकों की खरीदारी/बिकवाली), कंपनियों के Q3/Q4 रिजल्ट्स और ग्लोबल व डोमेस्टिक इकोनॉमिक डेटा। अगर ये सभी मोर्चों पर चीज़ें कंट्रोल में रहती हैं, तो बाज़ार में यह तेज़ी आगे भी कंटिन्यू कर सकती है।
इन्वेस्टर्स के लिए प्रो-टिप
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है की शुरुआती कारोबर में मिली यह तेज़ी निसंदेह एक अच्छा संकेत है, लेकिन इन्वेस्टर्स को थोड़ा संभलकर चलने की भी ज़रूरत है। शेयर बाज़ार में वोलाटिलिटी (उतार-चढ़ाव) बनी रहती है। इसलिए सिर्फ एक दिन की तेज़ी को देखकर जल्दबाज़ी में फैसले न लें बल्कि मजबूत फंडामेंटल्स वाली कंपनियों को चुनें और एक लॉन्ग-टर्म विज़न के साथ इन्वेस्टेड रहें।