बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर सोमवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। जलाभिषेक के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच अशोकधाम हॉल्ट के पास अचानक भगदड़ मच गई। हादसे में 8 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 9 लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
दो ट्रेनों के एक साथ पहुंचने से बिगड़े हालात
प्रशासन की शुरुआती जांच के मुताबिक, घटना के समय अशोकधाम हॉल्ट पर दोनों दिशाओं से एक साथ ट्रेनें पहुंचीं। ट्रेन को देखकर वहां मौजूद कुछ लोग अचानक भागने लगे। इसी दौरान भीड़ की भागदौड़ में बिजली का एक पोल गिर गया।
पोल गिरने के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच करंट फैलने की अफवाह तेजी से फैल गई। इसके बाद श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई और लोग सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे। देखते ही देखते भीड़ का दबाव बढ़ गया और कई श्रद्धालु जमीन पर गिर गए। इसी दौरान लोग भीड़ के नीचे दब गए।
करंट से नहीं हुई मौत, प्रशासन ने साफ की स्थिति
हादसे के शुरुआती दौर में 11 हजार वोल्ट के हाईटेंशन तार गिरने और करंट लगने की बात सामने आई थी। हालांकि, बाद में जिला प्रशासन ने इसे खारिज करते हुए स्थिति स्पष्ट की।
जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और एडीएम नीरज कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं की मौत करंट लगने से नहीं हुई, बल्कि भगदड़ के दौरान दबने के कारण हुई। प्रशासन के अनुसार, घटना के वक्त बिजली आपूर्ति बंद थी और बिजली के तार को कवर किया गया था।
मंदिर में सुबह से जुटी थी भारी भीड़
सावन की सोमवारी और जलाभिषेक को लेकर अशोकधाम मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। मंदिर परिसर और अशोकधाम हॉल्ट के आसपास भीड़ बढ़ती जा रही थी। इसी बीच ट्रेनों के एक साथ पहुंचने और उसके बाद फैली अफवाह ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
पुलिस-प्रशासन ने संभाला मोर्चा
भगदड़ की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों की मदद से राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन की टीमें मृतकों और घायलों की पहचान के साथ-साथ पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही हैं।
हादसे के बाद मंदिर और आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भीड़ का दबाव किस तरह बढ़ा और सुरक्षा व्यवस्था में किन स्तरों पर चूक हुई।
भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल
अशोकधाम मंदिर हादसे ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सावन की सोमवारी जैसे बड़े धार्मिक अवसरों पर हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए रेलवे हॉल्ट, मंदिर परिसर और आने-जाने वाले रास्तों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी हैं।