Speak Easy किताब समीक्षा सीमा आनंद
आज के दौर में जब हर जानकारी एक क्लिक पर मौजूद है, तब भी इच्छा, अंतरंगता और यौन स्वास्थ्य जैसे विषय समाज में आज तक फुसफुसाहट के स्तर से ऊपर नहीं आ पाए हैं। रिश्तों में खुलकर बात करना, अपने शरीर को समझना और अपनी लालसा को स्वीकार करना अब भी “शर्म” और “संकोच” की दीवारों में कैद है। ऐसे माहौल में सीमा आनंद एक साहसी और संवेदनशील आवाज़ के रूप में सामने आती हैं, जो न सिर्फ इस चुप्पी को तोड़ती हैं, बल्कि उसे समझ, करुणा और ज्ञान से भर देती हैं। नवंबर 2025 में प्रकाशित उनकी किताब Speak Easy: A Field Guide to Love, Longing and Intimacy इसी कोशिश का विस्तार है—एक ऐसी किताब जो उपदेश नहीं देती, बल्कि हाथ पकड़कर साथ चलती है।
शर्म से संवाद तक का सफर
Speak Easy कोई साधारण सेल्फ-हेल्प किताब नहीं है। यह सेक्स-एजुकेशन मैनुअल और एक भरोसेमंद दोस्त की बातचीत का अनोखा मेल है। सीमा आनंद, जो एक कहानीकार, माइथोलॉजिस्ट और सेक्स एजुकेटर हैं, ने दशकों के अनुभव, आधुनिक थेरेपी और विशेषज्ञों के साथ संवाद को इस किताब में पिरोया है। यह किताब उन सवालों को केंद्र में रखती है, जिन्हें लोग अक्सर अपने मन में दबा लेते हैं—क्योंकि समाज ने उन्हें पूछने की इजाजत ही नहीं दी। प्रेम, चाहत और सेक्स को यहां न तो पाप माना गया है और न ही सनसनी, बल्कि इंसानी अनुभव का स्वाभाविक हिस्सा बताया गया है।
सीमा आनंद का मानना है कि जब तक हम सवाल पूछने से डरते रहेंगे, तब तक रिश्तों में भ्रम और असंतोष बना रहेगा। Speak Easy इसी डर को धीरे-धीरे हटाती है और पाठक को यह एहसास दिलाती है कि जिज्ञासा और संवाद कमजोरी नहीं, बल्कि समझ की पहली सीढ़ी हैं।
प्राचीन ज्ञान और आधुनिक रिश्तों का संगम
सीमा आनंद प्राचीन भारतीय ग्रंथों, खासकर कामसूत्र, की विशेषज्ञ हैं। वे बार-बार यह याद दिलाती हैं कि पुरानी सभ्यताओं में स्त्री शरीर को शर्म का विषय नहीं, बल्कि आनंद और ज्ञान का स्रोत माना जाता था। जनवरी 2026 में शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कामसूत्र में पुरुषों को तोते से घंटों बातचीत करने की सलाह दी गई है, ताकि वे संवाद करना और भावनाओं को व्यक्त करना सीखें।
आज के डिजिटल युग में, जहां डेटिंग ऐप्स और ऑनलाइन कनेक्शन की भरमार है, वहां संवाद की कमी और भी गहरी हो गई है। Speak Easy इसी खालीपन की ओर इशारा करती है। सीमा संस्कृत के “रस” की अवधारणा को सामने रखती हैं, जहां आनंद को केवल सुख नहीं, बल्कि आत्म-ज्ञान का मार्ग माना गया है। वे स्व-आनंद को आत्म-सम्मान से जोड़ती हैं और इसे पीढ़ीगत मानसिक घावों को भरने का एक प्रभावी तरीका मानती हैं। किताब में साइकोसेक्शुअल थेरेपिस्ट डॉ. अन्विता मदन-बहेल के साथ मिलकर यौन स्वास्थ्य पर बिना किसी जजमेंट के व्यावहारिक सलाह दी गई है, जो इसे और भी विश्वसनीय बनाती है।
चुप्पी नहीं, बातचीत ही समाधान
सीमा आनंद उन मुद्दों पर भी खुलकर बात करती हैं, जिन्हें समाज अक्सर विवादास्पद मानता है—जैसे प्री-मैरिटल सेक्स, पॉलीएमोरी और कंडोम से जुड़े मिथक। उनका साफ कहना है कि प्री-मैरिटल सेक्स अपने आप में न तो सही है और न गलत; असली बात परिपक्वता, सुरक्षा और सहमति की है। उन्होंने यह भी साझा किया कि उनके बच्चों ने शादी से पहले अंतरंगता का अनुभव किया और उन्होंने इसे सामान्य माना। पॉलीएमोरी को लेकर वे कहती हैं कि यह सिर्फ “रिश्ते बदलने” की बात नहीं, बल्कि गहरी सहमति, ईमानदारी और भावनात्मक जिम्मेदारी पर आधारित होता है।
जनवरी 2026 में वायरल हुए एक पॉडकास्ट में उन्होंने एक 15 साल के लड़के द्वारा अभद्र भाषा में किए गए प्रपोजल की घटना साझा की, जो युवाओं में यौन शिक्षा की भारी कमी को उजागर करती है। पोडकास्ट के दौरान सीमा से पूछा गया की क्या उन्होंने कभी अपने पति को चीट किया है ? इस पर उन्होंने कहा-“ ऑफ कोर्स मैं भी इंसान हूँ…”
सीमा का मानना है कि चुप्पी कभी भी शुद्धता नहीं लाती, बल्कि विकास को रोक देती है। जब हम बात नहीं करते, तब गलतफहमियां और डर हमारी जगह ले लेते हैं। Speak Easy किसी नियम-पुस्तिका की तरह नहीं, बल्कि एक मुक्त करने वाले अनुभव की तरह सामने आती है। यह पाठक को यह भरोसा देती है कि उसकी चाहत, उसका शरीर और उसके सवाल गलत नहीं हैं। सीमा आनंद प्राचीन ज्ञान और आधुनिक ज़रूरतों के बीच एक मजबूत पुल बनाती हैं। आज, जब रिश्ते तेजी से बदल रहे हैं और पुराने ढांचे टूट रहे हैं, यह किताब हमें बिना डर अपनी लालसा को आवाज़ देने की हिम्मत देती है। क्योंकि सच्ची अंतरंगता वहीं से शुरू होती है, जहां हम खुलकर बोल पाते हैं—जहां हम सच में Speak Easy कर पाते हैं।
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