सोमवार, 20 जुलाई का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुआ। कमजोर वैश्विक संकेतों, मध्य-पूर्व (Middle-East) में बढ़ते तनाव और बड़े प्राइवेट बैंकों के उम्मीद से खराब Q1 नतीजों ने दलाल स्ट्रीट पर कोहराम मचा दिया।
कारोबार की शुरुआत में ही सेंसेक्स (Sensex) 700 अंक से ज्यादा (लगभग 1%) टूटकर 77,445 के निचले स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 (Nifty 50) में भी 180 से अधिक अंकों की गिरावट आई और यह 24,150 के स्तर तक गिर गया।
बाजार की इस भारी तबाही के पीछे मुख्य रूप से 6 बड़े कारण रहे। आइए विस्तार से जानते हैं कि किन वजहों ने निवेशकों के करोड़ों रुपये डुबो दिए।
1. बैंक शेयरों में भारी बिकवाली (Q1 Results Impact)
शेयर बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ा हाथ बैंकिंग सेक्टर का रहा। शनिवार को जारी हुए पहली तिमाही (Q1) के नतीजों ने निवेशकों को निराश किया:
- HDFC Bank और Axis Bank के शेयरों में लगभग 5% तक की भारी गिरावट देखी गई।
- Kotak Mahindra Bank का शेयर भी 3% से अधिक टूट गया।
- इसके चलते Nifty Private Bank Index में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। (हालांकि, ICICI Bank में 1% से ज्यादा की बढ़त रही।)
2. ईरान-अमेरिका में बढ़ा युद्ध का खतरा
वीकेंड पर ईरान और अमेरिका के बीच भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) और गहरा गया:
- अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार 9वें दिन हमले किए।
- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के पास दो तेल टैंकरों में धमाका हुआ, जिससे सप्लाई लाइन ठप होने का डर बढ़ गया है।
3. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $90 के पार
ईरान-अमेरिका के तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा:
- Brent Crude Futures: 3% से ज्यादा उछलकर $91 प्रति बैरल के पास पहुंच गया (11 जून के बाद का उच्चतम स्तर)।
- WTI Crude: 2% से ज्यादा बढ़कर $84.20 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
- तेल महंगा होने से भारत जैसे आयातक देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ जाता है।
4. वैश्विक बाजारों (Global Markets) से मिले बेहद कमजोर संकेत
दुनियाभर के प्रमुख बाजारों में छाई मंदी ने भारतीय बाजार का मूड भी बिगाड़ दिया:
- एशियाई बाजार: जापान का Nikkei और दक्षिण कोरिया का KOSPI 4% से ज्यादा टूट गए।
- अमेरिकी बाजार (Wall Street): बीते शुक्रवार को S&P 500 और Nasdaq 1% से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए थे।
5. US Bond Yields में बढ़ोतरी
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल ने निवेशकों को इक्विटी (शेयरों) से पैसा निकालकर सुरक्षित बॉन्ड्स में लगाने के लिए प्रेरित किया:
- 10-वर्षीय US Note Yield बढ़कर 4.551% हुई।
- 30-वर्षीय Bond Yield बढ़कर 5.073% तक पहुंच गई।
6. डॉलर के मुकाबले रुपया (Rupee) हुआ पस्त
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी फंड्स (FIIs) की निकासी से भारतीय रुपये में गिरावट जारी है:
- डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में 11 पैसे गिरकर 96.41 पर आ गया।
- विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये का रुझान फिलहाल कमजोरी की ओर ही बना रहेगा, जिसका रेंज 96.00 से 96.55 के बीच रहने का अनुमान है।
- हरे निशान वाले शेयर: टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल और आईसीआईसीआई बैंक में 1% से ज्यादा का उछाल देखा गया।
- सेक्टर का हाल: Nifty Realty और Financial Services में 1% से ज्यादा की गिरावट रही, जबकि Nifty PSU Bank Index 1% से ज्यादा चढ़ा।
- बाजार का रुझान: चौतरफा गिरावट के बावजूद एडवांस-डेक्लाइन रेशियो पूरी तरह खराब नहीं था। NSE पर 1,355 शेयरों में तेजी और 1,246 में मंदी देखी गई।