नई दिल्ली: चेन्नई में जन्मीं प्रमिला जयपाल का सफर भारत से अमेरिका और फिर अमेरिकी संसद तक पहुंचने की एक दिलचस्प कहानी है। महज 16 साल की उम्र में अकेले अमेरिका पहुंचने वाली प्रमिला ने अपनी मेहनत और सामाजिक सक्रियता के दम पर अमेरिकी राजनीति में अलग पहचान बनाई। आज वह डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख नेताओं में गिनी जाती हैं और अप्रवासियों के अधिकार, स्वास्थ्य सेवाओं, महिलाओं की सुरक्षा तथा आर्थिक समानता जैसे मुद्दों पर मुखर रहती हैं। अब उनकी नजर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में छठा कार्यकाल हासिल करने पर है। 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिडटर्म चुनाव में उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार निरव शेठ से है। ऐसे में आइए जानते हैं कौन हैं प्रमिला जयपाल और कैसे तय किया उन्होंने अमेरिकी संसद तक का सफर।
चेन्नई में जन्म, इंडोनेशिया और सिंगापुर में बीता बचपन
प्रमिला जयपाल का जन्म 21 सितंबर 1965 को चेन्नई में हुआ था। उनके पिता मुदुवंगड पुथनवीटिल जयपाल मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करते थे, जबकि उनकी मां माया जयपाल लेखिका थीं। प्रमिला का बचपन भारत के अलावा इंडोनेशिया और सिंगापुर में भी बीता। महज 16 साल की उम्र में वह अकेले अमेरिका चली गईं। यह उनके जीवन का ऐसा मोड़ था, जिसने आगे चलकर उनके राजनीतिक और सामाजिक सफर की दिशा तय की।
अमेरिका पहुंचने के बाद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी और अर्थशास्त्र की शिक्षा हासिल की। इसके बाद नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से वर्ष 1990 में एमबीए की डिग्री प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले उन्होंने वित्तीय विश्लेषक के तौर पर भी काम किया।
प्रमिला जयपाल राजनीति के साथ लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय रही हैं। उन्होंने ‘पिलग्रिमेज टू इंडिया: ए वुमन रिविजिट्स हर होमलैंड’ और ‘यूज द पावर यू हैव: ए ब्राउन वुमन्स गाइड टू पॉलिटिक्स एंड पॉलिटिकल चेंज’ नाम की किताबें लिखी हैं। उनकी शादी श्रमिक संगठनों से जुड़े नेता स्टीव विलियमसन से हुई है। उनके परिवार में पहले रिश्ते से एक बेटा जनक और एक सौतेला बेटा माइकल भी हैं। वह अपने परिवार के साथ वेस्ट सिएटल में रहती हैं।
अप्रवासियों के अधिकारों से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
प्रमिला जयपाल ने चुनावी राजनीति में कदम रखने से पहले सामाजिक मुद्दों पर काम करना शुरू किया था। अमेरिका में अप्रवासियों और उनके परिवारों के अधिकारों की लड़ाई के लिए उन्होंने ‘वनअमेरिका’ नाम के संगठन की स्थापना की। इस मंच के जरिए उन्होंने प्रवासी समुदाय की समस्याओं, नागरिकता और कानूनी अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए।
उनकी सक्रियता ने उन्हें अमेरिकी राजनीति में पहचान दिलाई। वर्ष 2015 में वह वॉशिंगटन स्टेट सीनेट के लिए चुनी गईं और 2015 से 2017 तक राज्य की सीनेट में अपनी जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद वर्ष 2016 में उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीता।
इस जीत के साथ वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई-अमेरिकी महिला बनीं। इसके बाद से वह लगातार चुनाव जीतती रही हैं। उन्होंने कांग्रेसनल प्रोग्रेसिव कॉकस का नेतृत्व भी किया है और फिलहाल इसकी चेयर एमेरिटा हैं। इसके अलावा वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की न्यायपालिका, विदेश मामलों और बजट से जुड़ी समितियों में भी काम करती हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर आर्थिक समानता तक, इन मुद्दों पर जोर
प्रमिला जयपाल की राजनीति में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, अप्रवासियों के अधिकार, मजदूरों की सुरक्षा, शिक्षा और आर्थिक असमानता प्रमुख मुद्दे रहे हैं। वह ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था की समर्थक हैं, जिसमें हर व्यक्ति को उसकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना इलाज की सुविधा मिल सके।
इसी सोच के तहत वह ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’ योजना का समर्थन करती रही हैं। इसका उद्देश्य अमेरिका में सभी नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा उपलब्ध कराना है।
जुलाई 2026 में उन्होंने सीनेटर एडवर्ड मार्की के साथ मिलकर ‘हेल्थ एंड वेल्थ एक्ट’ दोबारा पेश किया था। इस प्रस्ताव का उद्देश्य उन निवेश कंपनियों की गतिविधियों पर अधिक निगरानी और जांच सुनिश्चित करना है, जिनके पास स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं का मालिकाना हक है।
आवास का मुद्दा भी उनके राजनीतिक एजेंडे में शामिल है। उन्होंने ‘हाउसिंग इज अ ह्यूमन राइट एक्ट’ के माध्यम से बेघर लोगों की समस्या से निपटने और सभी के लिए बेहतर आवास की व्यवस्था करने की वकालत की है।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने ‘कॉलेज फॉर ऑल एक्ट’ के तहत सालाना 1.25 लाख डॉलर तक कमाने वाले परिवारों के बच्चों के लिए सरकारी कॉलेजों में मुफ्त शिक्षा का प्रस्ताव रखा है। इसमें सामुदायिक कॉलेज और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में मुफ्त पढ़ाई की सुविधा भी शामिल है।
17 साल तक नागरिकता का इंतजार, इसलिए इमिग्रेशन बना बड़ा मुद्दा
प्रमिला जयपाल खुद प्रवासी के तौर पर अमेरिका पहुंची थीं। उन्हें अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए 17 साल तक इंतजार करना पड़ा। यही अनुभव उनके राजनीतिक जीवन में अप्रवासियों के अधिकारों को अहम स्थान देता है।
वह अमेरिका में बिना कानूनी दस्तावेजों के रह रहे प्रवासियों को नागरिकता हासिल करने का रास्ता देने की समर्थक हैं। इसके साथ ही वह प्रवासी परिवारों को कानूनी सुरक्षा उपलब्ध कराने और उनके साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग करती रही हैं।
अमेरिका की इमिग्रेशन एजेंसी आईसीई की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर भी वह सवाल उठाती रही हैं। उनका जोर इस बात पर है कि प्रवासियों के अधिकारों की रक्षा हो और सरकारी एजेंसियां अपने कामकाज के लिए जवाबदेह रहें।
LGBTQ+ अधिकार और मजदूरों की मांगों पर भी सक्रिय
प्रमिला जयपाल LGBTQ+ समुदाय के अधिकारों की मुखर समर्थक रही हैं। वह ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी लोगों को भेदभाव से बचाने के लिए कानूनी सुरक्षा की वकालत करती हैं।
मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर भी उनका रुख स्पष्ट रहा है। वह अमेरिका में संघीय न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 15 डॉलर प्रति घंटा करने और श्रमिकों को संगठित होने का अधिकार देने का समर्थन करती हैं।
इसके अलावा उन्होंने ‘स्टूडेंट्स नॉट प्रॉफिट्स एक्ट’ जैसी पहलों का समर्थन किया है। नशे की लत से उबर रहे लोगों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने से जुड़े कानूनों के पक्ष में भी वह आवाज उठाती रही हैं।
2026 के चुनाव में निरव शेठ से मुकाबला, क्या मिलेगा छठा कार्यकाल?
प्रमिला जयपाल अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करती हैं। अब वह 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिडटर्म चुनाव में छठे कार्यकाल के लिए चुनाव मैदान में हैं। इस बार रिपब्लिकन पार्टी ने उनके मुकाबले निरव शेठ को उम्मीदवार बनाया है।
अगस्त में हुए प्राइमरी चुनाव में प्रमिला जयपाल को 84.7 प्रतिशत वोट मिले थे। अब मुख्य चुनाव में उनकी नजर एक बार फिर प्रतिनिधि सभा में पहुंचने पर है।
यह चुनाव अमेरिकी राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। मिडटर्म चुनाव के नतीजों से तय होगा कि अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी में से किसका प्रभाव अधिक रहेगा। इसका असर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में सरकारी नीतियों और फैसलों पर भी पड़ सकता है।
चेन्नई से शुरू हुआ प्रमिला जयपाल का सफर आज अमेरिकी संसद तक पहुंच चुका है। 16 साल की उम्र में अकेले अमेरिका जाने से लेकर वहां की राजनीति में अपनी पहचान बनाने तक उनका जीवन कई बड़े बदलावों से गुजरा है। अब 3 नवंबर के चुनाव नतीजे तय करेंगे कि वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में लगातार छठा कार्यकाल हासिल कर पाती हैं या नहीं।