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‘नारी शक्ति’ पर आर-पार; विपक्ष ने PM मोदी के संबोधन को बताया ‘चुनावी ड्रामा’ और ‘विधायी अपमान’

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष को ‘महिला विरोधी’ बताए जाने के बाद देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित प्रमुख विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री के हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे निष्पक्ष संबोधन के बजाय एक ‘पक्षपातपूर्ण हमला’ करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार की नीयत महिलाओं को आरक्षण देने की नहीं, बल्कि इस मुद्दे पर राजनीति करने की है।

जयराम रमेश का तीखा हमला: “मीडिया से डरते हैं गैर-गृहस्थ प्रधानमंत्री”

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के संबोधन की शुचिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्र के नाम संबोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय संकल्प को बढ़ाना होता है, न कि विपक्ष पर कीचड़ उछालना।

  • प्रेस कॉन्फ्रेंस की चुनौती: रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि लोकसभा में ‘विधायी अपमान’ झेलने के बाद प्रधानमंत्री विचलित हैं और वे आज भी मीडिया का सामना करने से डरते हैं।
  • देरी पर सवाल: उन्होंने पूछा कि सितंबर 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने के लिए 16 अप्रैल 2026 तक का इंतज़ार क्यों किया गया? रमेश ने इसे महिलाओं के साथ एक ‘बेशर्म और कपटपूर्ण’ प्रयास बताया।

मल्लिकार्जुन खरगे का ‘रिपोर्ट कार्ड’: महिलाओं से ज्यादा कांग्रेस का जिक्र

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी के भाषण का सांख्यिकीय विश्लेषण करते हुए सरकार को घेरा। खरगे ने कहा”प्रधानमंत्री ने अपने पूरे भाषण में 59 बार कांग्रेस का नाम लिया, जबकि महिलाओं का जिक्र केवल कुछ ही बार किया। इससे स्पष्ट होता है कि उनकी प्राथमिकता में देश की आधी आबादी नहीं, बल्कि राजनीतिक विरोध है।”

महुआ मोइत्रा की चुनौती: “अभी लागू करें आरक्षण”

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने प्रधानमंत्री के संबोधन को ‘ड्रामा’ करार देते हुए सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि स्क्रिप्ट और ‘गोदी मीडिया’ के जरिए सच्चाई नहीं छिप सकती। मोइत्रा ने चुनौती दी कि अगर सरकार गंभीर है, तो वह परिसीमन का इंतज़ार किए बिना इसी समय महिलाओं को 33% सीटें क्यों नहीं दे देती, जैसा कि ममता बनर्जी की पार्टी (TMC) पहले से कर रही है।

विवाद की जड़: परिसीमन और देरी

विपक्ष का मुख्य विरोध दो बिंदुओं पर केंद्रित है:

  1. अधिसूचना में देरी: 2023 में पारित बिल को 30 महीने बाद अप्रैल 2026 में अधिसूचित करना।
  2. परिसीमन का पेंच: विपक्ष का मानना है कि परिसीमन और जनगणना की शर्त लगाकर सरकार इस आरक्षण को भविष्य के लिए टाल रही है।

लोकसभा में हुए हालिया घटनाक्रमों के बाद प्रधानमंत्री का यह संबोधन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई को और चौड़ा कर गया है। जहां भाजपा इसे ‘नारी शक्ति’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ‘2026 के चुनावी चक्र’ को प्रभावित करने का एक औजार मान रहा है।

news desk

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