अगर किसी कारण से आपके दाँत टूट गए हैं या गिर गए हैं, तो भविष्य में उन्हें दोबारा उगाना संभव हो सकता है। जापान के वैज्ञानिकों ने TRG035 नाम की एक खास दवा विकसित की है, जो प्राकृतिक रूप से नए दाँत उगाने में मदद कर सकती है।
जापान में विकसित दाँत उगाने वाली दवा TRG035 के मानव परीक्षण जारी हैं। हाल ही में कंपनी ने अगले चरण के ट्रायल के लिए 53 लाख डॉलर की फंडिंग जुटाई है।
यह दवा USAG-1 नाम के एक प्रोटीन को रोकती है। यह प्रोटीन नए दाँतों की ग्रोथ को दबाने का काम करता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रोटीन को रोकने के बाद मसूड़ों में मौजूद निष्क्रिय कोशिकाएं सक्रिय हो सकती हैं और नए दाँत बनने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इंसानों में दूध के दाँत और स्थायी दाँत मिलाकर केवल दो बार दाँत आते हैं। लेकिन मसूड़ों के अंदर कुछ ऐसे दाँतों के अंकुर भी मौजूद होते हैं, जो सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाते। यह दवा इन्हीं निष्क्रिय अंकुरों को सक्रिय करने का काम करती है।
इस दवा को क्योटो यूनिवर्सिटी और मेडिकल स्टार्टअप टोरेजेम बायोफार्मा ने मिलकर विकसित किया है। इसका पहला मानव परीक्षण उन लोगों पर किया गया था, जिनकी कम से कम एक दाढ़ गायब थी।
अब कंपनी ने अगले चरण के ट्रायल के लिए करीब 53 लाख डॉलर (5.3 मिलियन डॉलर) की नई फंडिंग जुटाई है। साथ ही उन बच्चों पर भी परीक्षण की तैयारी की जा रही है, जिनके जन्म से ही कुछ दाँत नहीं होते।
फिलहाल यह दवा परीक्षण के दौर में है, लेकिन अगर इसके नतीजे सफल रहते हैं तो आने वाले वर्षों में दाँतों के इलाज का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि 2030 तक यह तकनीक आम लोगों के लिए उपलब्ध हो सकती है, जिससे टूटे या गायब दाँतों की समस्या का प्राकृतिक समाधान मिल सकेगा।
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