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Reading: आख़िर धरती क्यों हिलती है और भूकंप क्यों आते हैं? जानिए इसके पीछे का असली वैज्ञानिक कारण
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फीचर

आख़िर धरती क्यों हिलती है और भूकंप क्यों आते हैं? जानिए इसके पीछे का असली वैज्ञानिक कारण

news desk
Last updated: June 8, 2026 5:38 pm
news desk
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धरती पर जब अचानक कंपन महसूस होता है, इमारतें हिलने लगती हैं और लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आते हैं, तब हम इसे भूकंप कहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर धरती हिलती क्यों है? भूकंप आने के पीछे का असली वैज्ञानिक कारण क्या है? आइए इसे समझते हैं वैज्ञानिकों के दृष्टिकोण से।

Contents
धरती के अंदर लगातार चलती रहती है हलचलहाइपोसेंटर और एपिसेंटर क्या होते हैं?हाल के दिनों में कहां-कहां आए भूकंप?भूकंप आने के प्रमुख कारण क्या हैभूकंप के पीछे का वैज्ञानिक कारणभूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है?भारत में भूकंप का खतरा क्यों अधिक है?क्या भूकंप की कोइ सटीक भविष्यवाणी संभव है?जापान की तकनीक कैसे देती है पहले चेतावनी?भूकंप के समय क्या करें?

धरती के अंदर लगातार चलती रहती है हलचल

धरती बाहर से जितनी शांत दिखाई देती है, उसके अंदर उतनी ही हलचल चलती रहती है। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी कई बड़ी-बड़ी चट्टानी प्लेटों से बनी हुई है, जिन्हें “टेक्टोनिक प्लेट्स” कहा जाता है। ये प्लेटें लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं।
जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे से दूर जाती हैं या एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं, तब उनके बीच भारी दबाव पैदा होता है। यह दबाव वर्षों तक जमा होता रहता है। जब यह दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो अचानक ऊर्जा के रूप में बाहर निकलता है और धरती कांपने लगती है। इसी घटना को भूकंप कहा जाता है।

हाइपोसेंटर और एपिसेंटर क्या होते हैं?

भूकंप का केंद्र धरती के अंदर जिस स्थान पर होता है, उसे “हाइपोसेंटर” कहा जाता है, जबकि उसके ठीक ऊपर धरती की सतह पर मौजूद स्थान “एपिसेंटर” कहलाता है। एपिसेंटर के आसपास सबसे ज्यादा झटके महसूस किए जाते हैं।

हाल के दिनों में कहां-कहां आए भूकंप?

हाल ही में भारत और इसके पड़ोसी देशों में 7 जून 2026 की रात भूकंप आया था। इस भूकंप का केंद्र भूटान में था और रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.8 मापी गई थी। इसके झटके रात करीब 11:06 बजे असम, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में महसूस किए गए थे।
इससे पहले 5 जून 2026 की रात 10:04 बजे हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा-चंबा सीमा क्षेत्र में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके झटके पंजाब और हरियाणा तक महसूस किए गए थे।
वहीं, दुनिया भर की बात करें तो 8 जून 2026 को फिलीपींस में 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया और लगभग 32 लोगो ने अपनी जान गवा दी, जिसके बाद फिलीपींस और इंडोनेशिया के तटीय इलाकों में सुनामी की चेतावनी भी जारी की गई।

भूकंप आने के प्रमुख कारण क्या है

टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल: दुनिया में आने वाले अधिकांश भूकंप प्लेटों की गतिविधियों के कारण ही आते हैं। यह सबसे बड़ा और सामान्य कारण है।

ज्वालामुखी विस्फोट: जब ज्वालामुखी के भीतर दबाव बढ़ता है और लावा बाहर निकलता है, तब भी आसपास के क्षेत्रों में भूकंप आ सकते हैं।

मानव गतिविधियां: कुछ मामलों में बड़े बांधों का निर्माण, खनन कार्य और भूमिगत परमाणु परीक्षण भी छोटे भूकंपों का कारण बन सकते हैं।

भूकंप के पीछे का वैज्ञानिक कारण

पृथ्वी की आंतरिक संरचना: हमारी धरती की ऊपरी सतह स्थिर दिखाई देती है, लेकिन इसके नीचे “क्रस्ट” और “मेंटल” का ऊपरी हिस्सा मिलकर “लिथोस्फीयर” नामक कठोर परत बनाते हैं। ये परतें 7 बड़ी और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई हैं, जिन पर महाद्वीप और महासागर टिके हुए हैं।

प्लेटों का खिसकना और घर्षण: ये टेक्टोनिक प्लेटें स्थिर नहीं हैं, बल्कि मेंटल के गर्म और तरल पदार्थ पर हर साल कुछ मिलीमीटर की गति से खिसकती रहती हैं। खिसकते समय ये तीन प्रकार की सीमाएं बनाती हैं


कन्वर्जेंट: जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, डाइवर्जेंट: जब प्लेटें एक-दूसरे से दूर जाती हैं और ट्रांसफॉर्म: जब प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर रगड़ खाते हुए गुजरती हैं।

ऊर्जा का विस्फोट: जब प्लेटों के किनारे आपस में फंस जाते हैं, तब उनकी गति रुक जाती है लेकिन दबाव बढ़ता रहता है। जैसे ही यह दबाव घर्षण की सीमा को पार करता है, चट्टानें अचानक टूट जाती हैं और वर्षों से जमा ऊर्जा एक झटके में बाहर निकलती है। यही भूकंप का कारण बनती है।

भूकंपीय तरंगें और कंपन: ऊर्जा के मुक्त होने पर भूकंपीय तरंगें “Seismic Waves” चारों ओर फैलती हैं। जब ये तरंगें धरती की सतह तक पहुंचती हैं, तो जमीन हिलने लगती है।
हाइपोसेंटर: धरती के भीतर वह स्थान जहां चट्टानें टूटती हैं और ऊर्जा उत्पन्न होती है।
एपिसेंटर: धरती की सतह पर हाइपोसेंटर के ठीक ऊपर स्थित बिंदु, जहां झटके सबसे पहले और सबसे तेज महसूस होते हैं।

भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है?

3.0 से कम – हल्का भूकंप
4.0 से 5.9 – मध्यम भूकंप
6.0 से 6.9 – शक्तिशाली भूकंप
7.0 या उससे अधिक – अत्यंत विनाशकारी भूकंप

भारत में भूकंप का खतरा क्यों अधिक है?

भारत का उत्तरी भाग, विशेषकर हिमालयी क्षेत्र, भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। इसकी मुख्य वजह भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार हो रही टक्कर है। यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में भूकंप का खतरा अधिक रहता है।

क्या भूकंप की कोइ सटीक भविष्यवाणी संभव है?

विज्ञान ने काफी प्रगति कर ली है, लेकिन अभी तक कोई भी वैज्ञानिक या संस्था यह सटीक नहीं बता सकती कि भूकंप कब, कहां और कितनी तीव्रता का आएगा। हालांकि वैज्ञानिक उन क्षेत्रों की पहचान जरूर कर लेते हैं जहां भूकंप आने की संभावना अधिक होती है।

जापान की तकनीक कैसे देती है पहले चेतावनी?

जापान के पास उन्नत भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली “Earthquake Early Warning” – EEW है, जो भूकंप के झटके महसूस होने से कुछ सेकंड पहले ही लोगों को अलर्ट भेज देती है।
पी-वेव्स का पता लगाना:- भूकंप के दौरान सबसे पहले “P-Waves” निकलती हैं, जो तेज होती हैं लेकिन ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचातीं। जापान के सेंसर इन्हें तुरंत पहचान लेते हैं।

अलर्ट जारी करना जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) इन संकेतों के आधार पर भूकंप की तीव्रता और केंद्र का अनुमान लगाकर एस-वेव्स (S-Waves) पहुंचने से पहले चेतावनी जारी कर देती है।
यह चेतावनी 10 से 60 सेकंड पहले तक मिल सकती है। इस दौरान लोग सुरक्षित स्थान पर जा सकते हैं, गैस बंद कर सकते हैं और ट्रेनें स्वतः रुक जाती हैं।

भूकंप के समय क्या करें?

घबराएं नहीं और शांत रहें, मजबूत मेज या टेबल के नीचे शरण लें, खिड़कियों और भारी सामान से दूर रहें, लिफ्ट का उपयोग न करें, खुले स्थान पर जाने की कोशिश करें, आफ्टरशॉक्स यानी बाद के झटकों के लिए भी सतर्क रहें।

भूकंप प्रकृति की सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक है। यह हमें याद दिलाता है कि धरती का अंदरूनी हिस्सा लगातार सक्रिय है। हालांकि भूकंप को रोकना संभव नहीं है, लेकिन वैज्ञानिक जानकारी और सही तैयारी के जरिए इससे होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। धरती का एक झटका भले ही कुछ सेकंड का हो, लेकिन उसकी तैयारी हमें जीवनभर सुरक्षित रख सकती है।

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