नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस सौंपा है।
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्रीय मंत्री ने CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिसिया कार्रवाई और पैलेट गन/गोलीबारी के मुद्दे पर संसद में गलत बयान देकर लोकसभा को गुमराह किया है।
क्या है पूरा विवाद? 29 जुलाई को सदन में क्या हुआ था?
यह पूरा विवाद 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में एंटी-पेपर लीक कानून से जुड़े पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस) संशोधन विधेयक पर हो रही बहस के दौरान शुरू हुआ।
- विपक्ष का दावा: चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने CJP छात्र प्रदर्शन का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पैलेट गन और बल प्रयोग किया गया था।
- मंत्री का जवाब: विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन को आश्वस्त किया था कि प्रदर्शनकारियों पर कोई पैलेट गन या गोलियां नहीं चलाई गईं। पुलिस ने केवल आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया था। जब फायरिंग हुई ही नहीं, तो गोली चलाने का आदेश देने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
‘सदन से सच छिपाने’ का आरोप: विशेषाधिकार समिति से जांच की मांग
केसी वेणुगोपाल का कहना है कि जमीनी हकीकत मंत्री के दावों के ठीक उलट है। मंत्री ने जानबूझकर गलत तथ्य पेश करके संसद की गरिमा और विशेषाधिकारों का हनन किया है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे पत्र में वेणुगोपाल ने मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत संसद की विशेषज्ञ विशेषाधिकार समिति (Privileges Committee) के सुपुर्द किया जाए, ताकि यह साफ हो सके कि सदन के पटल पर गलत जानकारी किसने और क्यों दी।