इंटरनेट की दुनिया में अगर आप भी किसी ऐप या गेम को चलाने के लिए बस ‘I am 18+’ वाले ऑप्शन पर टिक करके आगे बढ़ जाते थे, तो अब यह आदत बदलने का वक्त आ गया है। गूगल एक ऐसा नया “एज वेरिफिकेशन सिस्टम” लेकर आ रहा है, जिसके बाद फर्जी उम्र बताकर ऐप इस्तेमाल करने का पुराना पैंतरा पूरी तरह फेल हो जाएगा। इस नई तकनीक का सीधा मकसद बच्चों और टीनेजर्स के लिए इंटरनेट को सुरक्षित और उनकी उम्र के मुताबिक बनाना है।
Play Signal API का नया जादू
गूगल ने एंड्रॉइड डेवलपर्स के लिए Play Signal API नाम का एक नया टूल रोलआउट करना शुरू कर दिया है। यह टूल ऐप को यह समझने में मदद करेगा कि उसे चलाने वाला यूजर असल में किस उम्र का है। अब अगर कोई बच्चा ऐसा ऐप डाउनलोड करने की कोशिश करेगा जो केवल बड़ों के लिए बना है, तो यह नया सिस्टम तुरंत पहचान लेगा और गलत उम्र डालकर ऐप चलाने की चालाकी काम नहीं आएगी।
प्राइवेसी रहेगी एकदम सेफ
अब आपके दिमाग में यह सवाल आ सकता है कि क्या गूगल आपकी जन्मतिथि या आईडी कार्ड जैसी पर्सनल डिटेल्स ऐप्स के साथ शेयर करेगा? तो इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। गूगल की इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ऐप डेवलपर्स को आपकी एग्जैक्ट बर्थडेट या कोई भी प्राइवेट डेटा नहीं मिलेगा। यह सिस्टम ऐप्स को सिर्फ एक सिंपल सिग्नल भेजेगा कि यूजर बच्चा है, टीनेजर है या एडल्ट, जिससे आपकी प्राइवेसी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
पैरेंट्स का रहेगा फुल कंट्रोल
इस पूरे सिस्टम को और ज्यादा आसान बनाने के लिए गूगल ने इसमें Family Link को भी जोड़ दिया है। अगर किसी बच्चे का गूगल अकाउंट उसके माता-पिता के फैमिली लिंक से कनेक्टेड है, तो पैरेंट्स एक ही जगह से उम्र से जुड़ी सेटिंग्स को मैनेज कर सकेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बच्चों को या पैरेंट्स को हर नए ऐप में जाकर अलग से अपनी उम्र की डिटेल्स भरने का झंझट नहीं झेलना पड़ेगा।
बिना परमिशन कुछ भी शेयर नहीं
गूगल ने इस बात को एकदम साफ कर दिया है कि यूजर या उसके माता-पिता की क्लियर परमिशन के बिना किसी भी ऐप को उम्र से जुड़ा सिग्नल नहीं भेजा जाएगा। अगर पैरेंट्स फैमिली लिंक में यह डिटेल्स ऐड नहीं करते हैं, तो ऐप डेवलपर को यूजर की उम्र के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलेगी। इस तरह कंपनी ने यूज़र्स की सेफ्टी और प्राइवेसी दोनों के बीच एक बेहतरीन बैलेंस बनाने की कोशिश की है।
कब मिलेगा यह अपडेट?
दुनिया भर में बच्चों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा के सख्त नियम आ रहे हैं, और गूगल का यह कदम उसी दिशा में एक बड़ा बदलाव है। कंपनी ने फिलहाल इस फीचर को ब्राजील में टेस्ट के तौर पर शुरू कर दिया है। गूगल का प्लान है कि इस साल के अंत तक इसे धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से भारत समेत दुनिया भर के सभी एंड्रॉइड यूजर्स के लिए रोलआउट कर दिया जाएगा, जिसके बाद फर्जी उम्र का जमाना पूरी तरह खत्म हो जाएगा।