एस जयशंकर और ईरान के उप विदेश मंत्री (Photo- MEA)
ईरान में हालिया घटनाक्रम और उसके सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे पर भारत सरकार की शुरुआती चुप्पी को लेकर देश में विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए थे। विपक्ष का कहना था कि ईरान के साथ भारत के लंबे और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, ऐसे में सरकार की प्रतिक्रिया सामने आनी चाहिए थी।
इसी बीच अब भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क तेज होते दिखाई दे रहे हैं। पिछले 24 घंटे में दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों के बीच तीन बार बातचीत या मुलाकात हुई है, जिसे बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित Raisina Dialogue के दौरान ईरान के उप विदेश मंत्री Saeed Khatibzadeh ने भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय हालात, द्विपक्षीय संबंधों और मौजूदा वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
इससे पहले गुरुवार को विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi से फोन पर बातचीत की थी। वहीं उसी दिन भारत के विदेश सचिव Vikram Misri नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचे, जहां उन्होंने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की याद में आयोजित शोक सभा में हिस्सा लिया और शोक रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर संवेदना व्यक्त की।
लगातार हो रहे इन संपर्कों के बीच राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता विपक्ष के दबाव का परिणाम है। हालांकि कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत अपनी संतुलित और रणनीतिक कूटनीति के तहत कदम उठाता है।
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