नई दिल्ली: हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। यही वजह है कि वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले अनेक श्रद्धालु गले में तुलसी की माला धारण करते हैं। मान्यता है कि तुलसी की माला पहनने से मन को शांति मिलती है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, शास्त्रों में तुलसी की माला धारण करने से जुड़े कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं। इन नियमों की अनदेखी करने पर इसके शुभ फलों में कमी आने की मान्यता है। आइए जानते हैं तुलसी की माला पहनने से जुड़े महत्वपूर्ण नियम।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी की माला धारण करने वाले व्यक्ति को सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए। माला पहनने के बाद मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसी तामसिक चीजों का सेवन वर्जित माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से दोष लग सकता है और माला धारण करने का शुभ प्रभाव कम हो सकता है।
यदि तुलसी की माला बाजार से खरीदी गई है, तो उसे सीधे गले में नहीं पहनना चाहिए। पहले गंगाजल और पंचामृत से उसका शुद्धिकरण करें। इसके बाद माला को भगवान विष्णु या भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने के बाद ही धारण करें।
तुलसी की माला केवल बाहरी आस्था का प्रतीक नहीं मानी जाती, बल्कि इसे धारण करने वाले व्यक्ति के विचार भी पवित्र होने चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध और झूठ जैसी प्रवृत्तियों से दूर रहना चाहिए। ऐसा न करने पर तुलसी की माला का शुभ फल प्राप्त नहीं होता।
शास्त्रों के अनुसार एक बार तुलसी की माला धारण करने के बाद उसे बार-बार गले से उतारना उचित नहीं माना जाता। केवल विशेष अशुद्ध परिस्थितियों में ही इसे उतारने की सलाह दी गई है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में बच्चे के जन्म या किसी सदस्य के निधन के बाद लगने वाले सूतक काल में तुलसी की माला उतारकर रख देनी चाहिए। अशुद्ध अवस्था में इसे धारण करना वर्जित माना गया है।
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार तुलसी की माला और रुद्राक्ष की माला को एक साथ धारण नहीं करना चाहिए। तुलसी का संबंध भगवान विष्णु से और रुद्राक्ष का संबंध भगवान शिव से माना जाता है। मान्यता है कि दोनों की ऊर्जा अलग होने के कारण इन्हें साथ पहनने से मानसिक अशांति उत्पन्न हो सकती है।
यदि आप तुलसी की माला से भगवान विष्णु या भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करते हैं, तो उसी माला को गले में धारण नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जप करने वाली माला अलग होनी चाहिए और उसे गोमुखी में सुरक्षित रखा जाना चाहिए, जबकि गले में पहनने वाली माला केवल धारण करने के लिए होती है।
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