पिछले ट्रेडिंग सेशन की धमाकेदार तेज़ी के बाद आज इंडियन स्टॉक मार्केट में थोड़ा ‘पॉज़’ और कंसोलिडेशन मोड देखने को मिल रहा है। शेयर बाज़ार पर आज की शुरुआत काफी फ्लैट और रेंज-बाउंड रही, जहाँ इन्वेस्टर्स नए ग्लोबल और डोमेस्टिक ट्रिगर का वेट करते हुए वेट-एंड-वॉच मोड में नज़र आए। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि एक बड़े उछाल के बाद इंडेक्स का इस तरह कूल-ऑफ होना पूरी तरह नॉर्मल है, जिसे ट्रेडर सिर्फ प्रॉफिट-बुकिंग और हेल्दी मार्केट एडजस्टमेंट की तरह देख रहे हैं।
आज बेल बजने से पहले ही गिफ्ट निफ्टी ने मार्केट की सुस्त ओपनिंग का अर्ली सिग्नल दे दिया था। मॉर्निंग ट्रेड में गिफ्ट निफ्टी लगभग 65 से 70 पॉइंट्स की गिरावट के साथ रेड ज़ोन में ट्रेड कर रहा था। इसके अलावा, एशियन मार्केट्स में जारी वोलेटिलिटी और वॉल स्ट्रीट से मिले मिक्स्ड सिग्नल्स ने भी डोमेस्टिक बायर्स को एग्रेसिव बाइंग करने से रोके रखा, जिससे शुरुआती घंटों में मार्केट पर थोड़ा प्रेशर महसूस हुआ।
बीते सेशन की इस शानदार रैली के असली हीरो आईटी और बैंकिंग सेक्टर्स रहे। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 2.32% का बड़ा स्पाइक देखा गया, जबकि बैंक निफ्टी भी 0.79% की बढ़त के साथ ग्रीन ज़ोन में बंद हुआ। हैवीवेट्स और इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें, तो इन्फोसिस (Infosys) और स्विगी (Swiggy) जैसे दिग्गजों ने पूरी रैली को लीड किया, जिससे ओवरऑल मार्केट सेंटीमेंट काफी पॉजिटिव बना रहा।
टेक्निकल एनालिस्ट्स का मानना है कि निफ्टी का ओवरऑल चार्ट स्ट्रक्चर अभी भी काफी बुलिश है। निफ्टी के लिए इमीडिएट सपोर्ट 24,100 से 24,000 के ज़ोन में है, जो काफी मजबूत आधार दे रहा है। वहीं, ऊपर की तरफ 24,350 से 24,500 का लेवल एक बड़ा रेजिस्टेंस ज़ोन बना हुआ है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि करंट लेवल्स पर FOMO में बाइंग करने के बजाय ‘बाय-ऑन-डिप्स’ की स्ट्रेटजी अपनाना सबसे स्मार्ट मूव होगा।
बैंकिंग इंडेक्स यानी बैंक निफ्टी में भी एक स्टेबिलिटी और कंसोलिडेशन देखा जा रहा है। बैंक निफ्टी के लिए 56,800 से 56,700 की रेंज एक क्रुशियल सपोर्ट ज़ोन का काम कर रही है। अगर आने वाले सेशंस में बैंक निफ्टी 57,600 – 57,700 के रेजिस्टेंस ब्रेकआउट को क्रॉस करके सस्टेन करता है, तो इसमें 58,100 तक की फ्रेश रैली ट्रिगर हो सकती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है की आज के सेशन और आने वाले दिनों में मार्केट का ट्रेंड मुख्य रूप से तीन बड़े कैटालिस्ट्स पर डिपेंड करेगा। पहला, कंपनियों के Q1 FY27 के तिमाही वित्तीय परिणाम, जो स्टॉक-स्पेसिफिक एक्शन तय करेंगे। दूसरा, FIIs का कैश-फ्लो डेटा कि विदेशी निवेशक नेट बायर्स हैं या सेलर्स। और तीसरा, मंथ-एंड के पास आने वाले ऑटो सेल्स नंबर्स, जिन पर बिग इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की पैनी नज़र बनी हुई है।
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