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छात्रों पर पेलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट हुई सख्त, घायलों को मुफ्त इलाज देने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश

देश की राजधानी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर पेलेट गन के कथित इस्तेमाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत की तीन जजों की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार को सभी घायल छात्रों को तुरंत नि:शुल्क इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने पुलिस और प्रशासन को घटना के दिन इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट पीठ का गठन और सुनवाई

इस संवेदनशील मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने घटना की गंभीरता को समझते हुए याचिका पर त्वरित रुख अपनाया और केंद्र सरकार व पुलिस प्रशासन से पूरी स्थिति की जानकारी मांगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को स्पष्ट हिदायत दी कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए सभी छात्रों को बेहतरीन और मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। पीठ ने कहा कि इलाज में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही नहीं होनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना राज्य सरकार का प्राथमिक दायित्व है।

एमुनेशन लॉग सुरक्षित रखने का आदेश

जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अदालत ने केंद्र और पुलिस प्रशासन को कड़ा आदेश दिया है। इसके तहत 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पुलिस बलों का ‘एमुनेशन लॉग’ (इस्तेमाल की गई गोलियों, पेलेट्स और आंसू गैस के गोलों का आधिकारिक रिकॉर्ड) पूरी तरह सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।

पेलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध से इंकार

याचिकाकर्ताओं द्वारा देश भर के प्रदर्शनों में पेलेट गन के इस्तेमाल पर तुरंत पूर्ण रोक लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करने से इंकार कर दिया। अदालत ने कहा कि असाधारण और हिंसक स्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों को नियमानुसार गैर-घातक बल प्रयोग की अनुमति देना जरूरी है।

पुलिस अधिकारों और भीड़ नियंत्रण पर टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई प्रदर्शन हिंसक रूप ले लेता है या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो पुलिस को अपनी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार है। सुरक्षा बलों के दायित्वों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन पर पूरी तरह से बंदिशें नहीं लगाई जा सकतीं।

क्या है पूरा मामला?

उल्लेखनीय है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित एक छात्र प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई थी। छात्रों का आरोप है कि पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने बेवजह बल प्रयोग किया और पेलेट गन चलाई, जिससे कई छात्रों के चेहरे और आंखों में गंभीर चोटें आईं। इस घटना के बाद ही मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंचा था।

news desk

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