ईरान विरोध प्रदर्शन खामेनेई बयान
तेहरान: ईरान में पिछले दो हफ्तों से जारी उग्र विरोध प्रदर्शनों को लेकर देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने पहली बार बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। शनिवार को एक सार्वजनिक भाषण में खामेनेई ने स्वीकार किया कि इन प्रदर्शनों के दौरान “हजारों” लोगों की मौत हुई है। उन्होंने माना कि कई हत्याएं “अमानवीय” और “बेहद क्रूर तरीके” से की गईं। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने इन घटनाओं की जिम्मेदारी अमेरिका और इजरायल से जुड़े तत्वों पर डालते हुए इसे विदेशी साजिश करार दिया।
खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें “अपराधी” बताया। उनका कहना था कि ट्रंप ने खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों को उकसाया और यहां तक कि उन्हें सैन्य समर्थन का वादा भी किया। खामेनेई ने दो टूक कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन देश के भीतर या बाहर मौजूद “अपराधियों” को सख्त सजा दी जाएगी।
ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 को शुरू हुए थे। शुरुआत में लोग महंगाई, बेरोजगारी और खराब आर्थिक हालात के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, लेकिन कुछ ही दिनों में यह आंदोलन सरकार और पूरे इस्लामी सिस्टम के खिलाफ बदल गया। कई शहरों में “मौत हो तानाशाह की” और “शाह जिंदाबाद” जैसे नारे सुनाई देने लगे। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद इसे ईरान का सबसे बड़ा जनविद्रोह माना जा रहा है।
सरकारी दावों से इतर, मानवाधिकार संगठनों की तस्वीर कहीं ज्यादा डरावनी है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) और अन्य संगठनों का कहना है कि अब तक 3,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इन रिपोर्टों में सुरक्षा बलों द्वारा लाइव फायरिंग, छतों से गोलीबारी और बेरहम दमन के कई मामले दर्ज किए गए हैं। इससे पहले ईरानी अधिकारी सिर्फ सैकड़ों मौतों की ही बात मानते रहे थे।
खामेनेई के बयान के बाद भी हालात शांत नहीं हुए हैं। पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट जारी है, जिससे जमीनी हालात की सही जानकारी बाहर पहुंचना मुश्किल बना हुआ है। तेहरान, इस्फहान, तबरीज, जंजान और क़ेश्म जैसे कई शहरों में प्रदर्शन फैल चुके हैं और सुरक्षा बल पूरी सख्ती के साथ तैनात हैं।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में प्रदर्शनकारियों से आंदोलन जारी रखने की अपील की है और सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही हत्याओं पर सैन्य हस्तक्षेप की धमकी भी दी है। ट्रंप खुले तौर पर ईरान में “नई लीडरशिप” की मांग कर रहे हैं। इन बयानों ने हालात को और भड़का दिया है और ईरान का राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है।
फिलहाल, देश के भीतर सरकार विरोधी गुस्सा बढ़ता जा रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान में हो रहे दमन की कड़ी आलोचना कर रहा है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह आंदोलन किस दिशा में जाता है, लेकिन इतना साफ है कि ईरान इस समय अपने सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है।
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