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Cash Holdings In India: UPI के दौर में अचानक क्यों बढ़ी 100 और 200 के नोटों की डिमांड? भारतीय घरों में कैश जमा होने की ये है असली वजह

नई दिल्ली। स्मार्टफोन और डिजिटल पेमेंट (UPI) के इस दौर में जहां जेब में वॉलेट रखना लगभग बंद हो गया है, वहीं भारतीय बाजार में एक बेहद हैरान करने वाला ट्रेंड सामने आया है। देश में अचानक 100 और 200 रुपये के छोटे नोटों की मांग (Cash Demand in India) तेजी से बढ़ रही है। लोग बड़े नोटों (जैसे 500 रुपये) के बजाय इन छोटे नोटों को अपने घरों में एहतियातन कैश के रूप में जमा कर रहे हैं।

बैंकिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बाजार में नोटों की किसी कमी का संकेत नहीं है, बल्कि इसके पीछे बदलती वैश्विक परिस्थितियां और आम जनता की खास ‘कंज्यूमर साइकोलॉजी’ काम कर रही है।

पश्चिम एशिया में तनाव और ग्लोबल अनिश्चितता बना बड़ा कारण

मीडिया रिपोर्ट्स और आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस नए कैश ट्रेंड के पीछे भू-राजनीतिक (Geopolitical) और आर्थिक कारण छिपे हैं:

  • वैश्विक संकट का असर: पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते लगातार तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय उपभोक्ताओं में सावधानी बरतने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
  • इमरजेंसी बैकअप: किसी भी बड़े आर्थिक या तकनीकी संकट (जैसे सर्वर डाउन होना या साइबर अटैक) की स्थिति से निपटने के लिए लोग डिजिटल पेमेंट के साथ-साथ घर में पर्याप्त नकद राशि रखना सुरक्षित मान रहे हैं।


कोविड-19 महामारी के बाद सबसे तेज रफ्तार, क्या बैंकिंग पर भरोसा हुआ कम?

आंकड़ों के मुताबिक, देश में लोगों के पास मौजूद नकदी (Currency with Public) की रफ्तार कोविड-19 महामारी के बाद अब सबसे तेज देखी जा रही है।

  • अलर्ट मोड पर लोग: कोरोना काल में लगे लॉकडाउन और आपातकालीन स्थितियों ने लोगों को यह सिखाया कि मुश्किल समय में हाथ में कैश होना कितना जरूरी है। यही वजह है कि लोग अब पहले से ही अलर्ट मोड पर हैं।
  • डिजिटल पेमेंट भी रिकॉर्ड स्तर पर: हालांकि, इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि देश का बैंकिंग सिस्टम या यूपीआई पर भरोसा कम हुआ है। यूपीआई ट्रांजैक्शन हर महीने नए रिकॉर्ड बना रहे हैं, लेकिन अब लोग “स्मार्ट हाइब्रिड मॉडल” (डिजिटल + कैश) अपना रहे हैं।

क्या मार्केट में है 100 और 200 के नोटों की किल्लत?

आरबीआई (Reserve Bank of India) और बैंकिंग सूत्रों की मानें तो इस सवाल का सीधा जवाब है—नहीं। भारतीय रिजर्व बैंक के पास और पूरे बैंकिंग सिस्टम में करेंसी की कोई आधिकारिक कमी नहीं है। नोटों की सप्लाई पूरी तरह सामान्य और पर्याप्त है। बाजार में छोटे नोटों की जो भी हलचल दिख रही है, वह विशुद्ध रूप से लोगों की एहतियातन नकदी अपने पास होल्ड करने की आदत (Cash Hoarding Habit) के कारण है।

news desk

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