अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे (दान) की चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ ने अब तक का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है।
28 जून को पुलिस की स्पेशल टीमों ने एक साथ 10 संवेदनशील ठिकानों पर छापेमारी की है। इस महा-अभियान के तहत अब तक आरोपियों के ठिकानों से 79 लाख 85 हजार रुपये की नकद रिकवरी की जा चुकी है।
इस बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफों के बाद अयोध्या से लेकर दिल्ली तक सियासी भूचाल आ गया है।
मनीष यादव के घर पर ताला टूटा: आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के भतीजे मनीष यादव के घर पर कल से ताला बंद था और पड़ोसी भी पुलिस को सहयोग नहीं कर रहे थे। पुलिस ने ताला तोड़कर घर के भीतर प्रवेश किया। बता दें कि मनीष के पास से पहले ही 2 लाख रुपये बरामद हो चुके हैं।
टिन्नू के 14 कमरों के हॉस्टल में छानबीन: पुलिस आरोपी टिन्नू यादव को साथ लेकर दुर्गापुरी कॉलोनी स्थित उसके हॉस्टल पहुंची, जिसमें 13 कमरे और एक बड़ा हॉल है। पुलिस ने कमरे खुलवाकर सघन चेकिंग की। हालांकि, टिन्नू की बहन ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे फंसाने की साजिश बताया है।
दस्तावेज हुए बरामद: आरोपी अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के पैतृक आवास मिल्कीपुर ग्रामीण क्षेत्र में भी छापेमारी चल रही है। रमाशंकर मिश्रा के घर से पुलिस को कुछ बेहद अहम दस्तावेज और रिकॉर्ड हाथ लगे हैं।
योग केंद्र से जुड़े अविनाश शुक्ला पर शिकंजा: कौशलपुरी इलाके में आरोपी अविनाश शुक्ला के घर पहुंची पुलिस ने पड़ोस के दुकानदारों के बयान दर्ज किए। पता चला है कि अविनाश करीब एक साल से एक योग केंद्र के परिसर में रह रहा था और मंदिर के कामकाज से जुड़ा था।
शुरुआती चर्चाओं में दावा किया जा रहा था कि राम मंदिर ट्रस्ट को पूरी तरह भंग कर दिया जाएगा। लेकिन आधिकारिक सूत्रों के हवाले से एक बड़ा अपडेट सामने आया है।
भंग नहीं, बल्कि होगा बदलाव: ट्रस्ट को भंग नहीं किया जाएगा, बल्कि इसके प्रशासनिक ढांचे में आमूल-चूल बदलाव किए जाएंगे।
नृपेंद्र मिश्रा बन सकते हैं CEO : ट्रस्ट में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सीईओ (CEO) पद की व्यवस्था की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का नया सीईओ नियुक्त किया जा सकता है।
11 जुलाई को महाबैठक: आगामी 11 जुलाई को होने वाली हाई-लेवल बैठक में नए महासचिव और अन्य पदाधिकारियों की आधिकारिक नियुक्ति का ऐलान हो सकता है।
सियाराम उमर वैश्य (समाजसेवी): प्रतापगढ़ के रहने वाले रामभक्त सियाराम उमर वैश्य ने साल 2018 में अपनी जमीन बेचकर मंदिर निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये दान दिए थे। गबन की खबरों से आहत होकर उन्होंने कहा, “मैंने यह सोचकर पैसा दिया था कि यह राम के काम आएगा। ऐसे भ्रष्टाचारियों को ईश्वर कभी माफ नहीं करेगा।”
दान चोरी के इस महा-विवाद पर राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है
सौरभ भारद्वाज (AAP): दिल्ली के ‘आप’ नेता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “पुलिस जानबूझकर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है, ताकि उन्हें सारे सबूत नष्ट करने का मौका मिल सके।एसआईटी (SIT) का गठन भी केवल समय काटने के लिए किया गया है।”
प्रियंका कक्कड़ (AAP): उन्होंने इसे ‘धर्मयुद्ध’ करार देते हुए कहा, “प्रभु राम के घर में डाका डालने वाले इन राक्षसों को जब तक फांसी नहीं हो जाती, हम शांत नहीं बैठेंगे। हैरानी की बात है कि राहुल गांधी इस बड़े मुद्दे पर बिल्कुल चुप हैं।”
दिग्विजय सिंह (कांग्रेस): कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, “मैंने खुद ₹1,11,000 का चेक से दान दिया था।पीएम मोदी ने खुद इन ट्रस्टियों को नियुक्त किया था, फिर भी वे आज तक इस भारी लूट पर चुप क्यों हैं?”
विपक्षी हमलों पर बीजेपी का जवाब: भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने पलटवार करते हुए कहा, “जो राम मंदिर में चोरी की जुर्रत कर सकता है, उसकी हिम्मत को योगी सरकार पूरी तरह तोड़ देगी। ऐसी मिसाल कायम की जाएगी कि आगे कोई मंदिर की तरफ कुदृष्टि न डाल सके।”
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