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ऑपरेशन सिंदूर पर सियासत तेज, 6 सैनिकों की शहादत पर सरकार vs विपक्ष आमने-सामने

नई दिल्ली। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शहीद हुए 6 सैनिकों की पहचान को लेकर देश में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए इस ऑपरेशन में सैनिकों की शहादत को छिपाकर रखा। हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि सभी वीर सैनिकों को समय रहते सम्मान और मान्यता दी जा चुकी थी।क्या है पूरा विवाद?

विवाद तब सामने आया जब राष्ट्रीय समर स्मारक पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शहीद 6 सैनिकों के नाम अंकित किए गए। इसके बाद विपक्ष ने दावा किया कि इन शहीदों की पहचान अब जाकर सार्वजनिक हुई है, जबकि पहले इसे छिपाया गया था।

रक्षा मंत्रालय का स्पष्टीकरण

रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे दावे भ्रामक हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन सैनिकों की शहादत को पहले ही सार्वजनिक मंचों पर सम्मानित किया जा चुका था।

मंत्रालय ने बताया कि 11 मई 2025 को, ऑपरेशन के समापन के तुरंत बाद आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने इन वीरों को श्रद्धांजलि दी थी और उनके सर्वोच्च बलिदान की पुष्टि की थी।

पहले ही मिल चुका है वीरता सम्मान

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 14 अगस्त 2025 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इन सैनिकों को वीरता पुरस्कार दिए जाने की जानकारी सार्वजनिक की गई थी। इसके अलावा:

  • 15 जनवरी 2026 को आर्मी डे परेड (जयपुर) में 3 सैनिकों के परिजनों को सेना मेडल (वीरता) प्रदान किया गया
  • 8 अक्टूबर 2025 को वायुसेना दिवस पर भी संबंधित वीर सैनिकों के परिवारों को सम्मानित किया गया

सेना ने भी दी थी तत्काल श्रद्धांजलि

भारतीय सेना की जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कोर ने भी अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स पर इन सैनिकों को तत्काल श्रद्धांजलि दी थी। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह भारतीय सशस्त्र बलों की परंपरा है कि हर शहीद को पूर्ण सम्मान और गरिमा के साथ याद किया जाता है।

शहीद सैनिकों के नाम

ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए 6 सैनिकों के नाम इस प्रकार हैं:

  1. सूबेदार मेजर पवन कुमार (पंजाब रेजीमेंट)
  2. राइफलमैन सुनील कुमार (जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंट्री)
  3. लांस नाइक दिनेश कुमार (फील्ड रेजीमेंट, आर्टिलरी)
  4. अग्निवीर मुद मुरली नाइक (लाइट रेजीमेंट, आर्टिलरी)
  5. हवलदार सुनील कुमार सिंह (EME)
  6. सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (वायुसेना)

इसके अलावा, BSF के एक सब-इंस्पेक्टर और एक जवान ने भी इस ऑपरेशन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया।

‘शहादत पर राजनीति न करें’-सरकार

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे पर अनावश्यक विवाद खड़ा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे दावे न केवल तथ्यों को गलत तरीके से पेश करते हैं, बल्कि शहीदों के परिवारों की भावनाओं को भी आहत कर सकते हैं।

राष्ट्र के नायक हैं ये सैनिक

सरकार ने दोहराया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के सभी शहीद सैनिक राष्ट्र के नायक हैं। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

news desk

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