ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद देश में सत्ता का महासंग्राम शुरू हो चुका है। एक तरफ नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई रहस्यमयी तरीके से गायब हैं, वहीं दूसरी तरफ कट्टरपंथियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि अली खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई और विदेश मंत्री पर सरेआम पत्थर बरसाए गए। ईरान की संसद से लेकर सड़कों तक, हर तरफ सिर्फ एक ही चर्चा है- क्या ईरान में ‘पर्दे के पीछे’ कोई बड़ा तख्तापलट हो चुका है?
ईरान संकट की 5 बड़ी बातें
- गायब हैं नए सर्वोच्च नेता: अली खामेनेई के बाद कमान संभालने वाले मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, जिससे सस्पेंस गहरा गया है।
- विदेश मंत्री पर पथराव: अंतिम यात्रा के दौरान विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थर फेंके गए और उन्हें ‘देशद्रोही’ कहकर भगाया गया।
- राष्ट्रपति को खुली धमकी: कट्टरपंथी गुटों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
- तख्तापलट का आरोप: ईरान के कट्टरपंथी सांसदों का दावा है कि सरकार, संसद और सर्वोच्च नेता को दरकिनार कर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को सर्वेसर्वा बनाने की साजिश चल रही है।
- सरकार का पलटवार: राष्ट्रपति पेजेशकियन ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
जनाजे में बवाल: विदेश मंत्री को भागना पड़ा, राष्ट्रपति के लगे ‘मुर्दाबाद’ के नारे
ईरान में तनाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान भारी हिंसा और नारेबाजी देखने को मिली। कट्टरपंथी भीड़ ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को देखते ही “समझौतावादी मुर्दाबाद” के नारे लगाने शुरू कर दिए।
बात यहीं नहीं रुकी, अमेरिका के साथ बातचीत की पैरवी करने वाले विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर भीड़ ने पत्थरबाजी कर दी। हालात इतने बेकाबू हो गए कि विदेश मंत्री को अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जान बचाकर भागना पड़ा।
मोजतबा खामेनेई की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ ने लगाई आग
ईरान में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यह है कि मोजतबा खामेनेई कहां हैं? पिता की मौत के बाद उन्हें नया सर्वोच्च नेता तो घोषित कर दिया गया, लेकिन उनकी लगातार गैरमौजूदगी ने अटकलों के बाजार को गर्म कर दिया है।
कट्टरपंथियों का बड़ा आरोप: सांसद कमरान गजनफरी और महमूद नबावियन का दावा है कि राष्ट्रपति पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अराघची की ‘त्रिमूर्ति’ मोजतबा खामेनेई की चुप्पी का फायदा उठा रही है। ये तीनों मिलकर सर्वोच्च नेता के निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं और अमेरिका के साथ ‘गुप्त समझौता’ कर ईरान की क्रांतिकारी विचारधारा को बेच रहे हैं।
युद्धविराम टूटा और शुरू हुआ गृहयुद्ध जैसा माहौल
दरअसल, यह पूरा विवाद अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम के टूटने के बाद बढ़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरानी सेना की कार्रवाई के बाद अमेरिका ने जवाबी हमले किए थे। इसके बाद से ही ईरान का कट्टरपंथी धड़ा भड़का हुआ है और वह अमेरिका-इजरायल के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई चाहता है, जबकि मौजूदा सरकार प्रतिबंधों में राहत के लिए बातचीत के पक्ष में है।
सरकार भी आर-पार के मूड में, कट्टरपंथियों पर एक्शन शुरू
ईरान के भीतर मचे इस घमासान के बीच राष्ट्रपति पेजेशकियन ने भी साफ कर दिया है कि वह झुकने वाले नहीं हैं। सरकार ने कट्टरपंथियों के पंख काटने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में सबसे मुखर विरोधी सांसद महमूद नबावियन को संसद की बेहद पावरफुल राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से हटा दिया गया है।
आगे क्या होगा? भू-राजनीतिक विशेषज्ञों (Geopolitical Experts) का मानना है कि ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे नाजुक मोड़ पर है। यदि मोजतबा खामेनेई जल्द ही सामने आकर स्थिति साफ नहीं करते हैं, तो ईरान के भीतर गृहयुद्ध या सैन्य तख्तापलट की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता।