नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ और मॉक पार्लियामेंट का आयोजन किया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में हुई इस कार्यवाही में विपक्षी सांसदों, नेताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सत्र के दौरान एक प्रस्ताव पारित कर ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने के आरोप लगाए गए। विपक्ष ने उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने और उन्हें कानून के कटघरे में लाने की मांग भी की।
यह आयोजन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली INDIA गठबंधन की महारैली से ठीक पहले हुआ। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जाने जरूरी हैं। हालांकि, इस पूरी कार्यवाही को विपक्ष ने प्रतीकात्मक महाभियोग का नाम दिया था। यह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होने वाला औपचारिक महाभियोग नहीं था।
राहुल गांधी बोले- ‘ज्ञानेश कुमार ज्यादा दिन CEC नहीं रहेंगे’
प्रतीकात्मक कार्यवाही के समापन पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे राजनीतिक हथियार बताते हुए कहा कि यह असाधारण स्थिति है कि देश के विपक्षी दलों को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक निजी आवास के बगीचे में बैठकर ऐसी कार्यवाही करनी पड़ रही है। उनके मुताबिक, विपक्ष के लिए संवैधानिक संस्थाओं के दरवाजे बंद हो गए हैं।
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने और उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा करने से जुड़े प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने CEC को संबोधित करते हुए कहा कि जिस संस्था की रक्षा करने की जिम्मेदारी उनके पास है, उसी के पीछे वह छिप रहे हैं। राहुल ने चेतावनी दी कि एक दिन उन्हें देश की जनता के प्रतिनिधियों का सामना करना पड़ेगा।
राहुल गांधी ने दावा किया कि SIR के दौरान मतदाता सूचियों से 13.3 करोड़ यानी करीब 15 प्रतिशत वोट काटे गए, जबकि 2024 के चुनाव में जीत और हार का अंतर महज 3 प्रतिशत था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के आंकड़े ही 2024 के लोकसभा चुनावों की वैधता पर सवाल खड़े करते हैं। राहुल ने यह भी कहा कि विपक्ष के पास पर्याप्त सबूत हैं और आने वाले समय में ऐसे खुलासे होंगे, जिनके बाद ज्ञानेश कुमार अपने पद पर नहीं रह पाएंगे। ये सभी आंकड़े और आरोप राहुल गांधी तथा विपक्षी दलों की ओर से रखे गए दावे हैं।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने CEC पर लगाए ये 6 आरोप
मॉक पार्लियामेंट में प्रस्ताव पेश करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर छह प्रमुख आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि CEC प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर रहे हैं। विपक्ष की ओर से रखे गए आरोपों में प्रमुख रूप से ये बातें शामिल थीं:
- SIR के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप: खड़गे ने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान करीब 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
- संसद को जानकारी दिए बिना नियम बदलने का आरोप: विपक्ष का कहना है कि संसद को भरोसे में लिए बिना फॉर्म-6 से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया।
- ECINET के इस्तेमाल पर सवाल: खड़गे ने आरोप लगाया कि ECINET के जरिए मतदाता सूचियों पर नियंत्रण स्थापित किया गया।
- अन्य चुनाव आयुक्तों को फैसलों से अलग रखने का आरोप: विपक्ष ने दावा किया कि चुनाव आयोग के बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों को महत्वपूर्ण फैसलों की प्रक्रिया से दरकिनार किया गया।
- चुनाव आयुक्त कानून में कानूनी छूट का मुद्दा: खड़गे ने 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे CEC को ऐसी कानूनी छूट मिली है, जो राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को भी हासिल नहीं है।
- चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित करने का आरोप: विपक्ष का आरोप है कि इन फैसलों और प्रक्रियाओं से चुनाव आयोग की निष्पक्षता तथा स्वतंत्रता कमजोर हुई है।
खड़गे ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई किसी व्यक्ति से निजी दुश्मनी की वजह से नहीं है। उनके मुताबिक, यह मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा का सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के जरिए गरीबों, महिलाओं और युवाओं के मताधिकार को प्रभावित किया जा रहा है।
खरगे के आवास के बगीचे में लोकसभा जैसा मंच, कई बड़े नेता हुए शामिल
इस प्रतीकात्मक ‘मॉक पार्लियामेंट’ के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास के बगीचे में लोकसभा जैसा मंच तैयार किया गया था। वहां पीछे लकड़ी का पैनल लगाया गया और सांसदों के बैठने के लिए अर्धचंद्राकार व्यवस्था की गई। शुरुआती तीन पंक्तियों में माइक भी लगाए गए थे, ताकि कार्यवाही संसदीय बहस की तरह संचालित हो सके।
इस कार्यक्रम में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और माकपा के जॉन ब्रिटास शामिल हुए। छात्र नेता नेहा बोरा, योगेंद्र यादव और निखिल डे समेत नागरिक समाज से जुड़ी कई हस्तियों तथा मतदाता सूची से प्रभावित होने का दावा करने वाले लोगों ने भी हिस्सा लिया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह संविधान की रक्षा के लिए आम जनता, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के एकजुट होने का प्रयास है।
रामलीला मैदान की महारैली से पहले विपक्ष ने तेज की चुनाव आयोग के खिलाफ मुहिम
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ की कार्यवाही को विपक्ष ने अपने व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाया है। एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली महारैली में भी SIR, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और कथित वोट चोरी के मुद्दे उठाए जाने की तैयारी है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। वहीं, इस आयोजन के जरिए INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाने और अपने आरोपों को सार्वजनिक मंच से उठाने की रणनीति अपनाई है। अब देखना होगा कि रामलीला मैदान की रैली में विपक्ष इन मुद्दों को किस तरह आगे रखता है।