राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले को लेकर अयोध्या में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले में अब अयोध्या बार एसोसिएशन ने बड़ा फैसला लिया है। बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों के समूह ने निर्णय लिया कि चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार किसी भी आरोपी का मुकदमा नहीं लड़ा जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल कानूनी मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और राम मंदिर की गरिमा से जुड़ा विषय है।
बैठक में वकीलों ने साफ कहा कि मंदिर में चढ़ाए गए दान और चढ़ावे को भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति उस धन के साथ गड़बड़ी करता है, तो वह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है। इसी वजह से अधिवक्ताओं ने आरोपियों की ओर से अदालत में पैरवी नहीं करने का फैसला

इस मामले में गिरफ्तार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत अन्य आरोपियों को इस फैसले से बड़ा झटका लगा है। बार एसोसिएशन का कहना है कि मंदिर की मर्यादा और श्रद्धालुओं की भावनाएं उनके लिए सर्वोपरि हैं और इसी सिद्धांत के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। बैठक के दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने चम्पत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राय के खिलाफ भी नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि इन तीनों को तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ देना चाहिए। वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना था कि जरूरत पड़ने पर पूरी अयोध्या को जाम कर दिया जाएगा और किसी भी व्यक्ति को शहर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। हालांकि यह चेतावनी बार एसोसिएशन की बैठक के दौरान व्यक्त की गई मांग है।
फिलहाल, इन मांगों और चेतावनियों को लेकर संबंधित पक्षों या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, चढ़ावा चोरी मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित नियमों के अनुसार जारी है। साथ ही SBI समेत 3 बैंकों से आरोपियों के खातों-लॉकरों की डिटेल भी मांगी गई है।
इस्तीफा देने के बाद चम्पत राय की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं। जांच एजेंसियां इस मामले में बेहद मुस्तैद दिखाई दे रही हैं, जिसके तहत उनके ड्राइवर समेत अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले की जांच काफी तेजी से आगे बढ़ रही है।
राम मंदिर देशभर के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावा चोरी के मामले ने धार्मिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। अब सभी की नजरें इस मामले की जांच, अदालत की कार्यवाही और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।