नई दिल्ली: छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। इस बीच महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सरकारों ने मामलों को लेकर अहम कदम उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बदली स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए नाबालिगों और ऐसे युवाओं को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले से दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखी जा सकती है। इसी आदेश के बाद महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सरकारों ने अपनी कार्रवाई शुरू की।
महाराष्ट्र सरकार ने शुरू की एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया
महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी। मुख्यमंत्री ने गृह विभाग को आवश्यक निर्देश दिए और पुलिस से कहा कि एफआईआर में नामजद लोगों के खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। अकेले मुंबई में 20 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें एक हजार से अधिक लोगों के नाम शामिल हैं।
गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जब तक मामलों को वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक न गिरफ्तारी होगी, न आरोपियों के घर पुलिस जाएगी और न ही कोई अन्य दंडात्मक कदम उठाया जाएगा।
बंगाल सरकार ने भी दी राहत, लेकिन रखी यह शर्त
पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि यह राहत उन लोगों पर लागू नहीं होगी, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है। सरकार के मुताबिक, 26 जुलाई की शाम तक पुलिस की शिकायत पर एक मामला दर्ज हुआ था, जिसमें 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सभी 16 आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई।
इसके अलावा पत्रकारों पर कथित हमले के आरोपों को लेकर छह अन्य मामले भी दर्ज किए गए हैं।
केरल में भी मामलों की समीक्षा के निर्देश
कांग्रेस शासित केरल में मुख्यमंत्री ने गृह विभाग को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की जांच करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि अधिकांश मामले सार्वजनिक स्थानों पर गैरकानूनी जमावड़े जैसे जमानती अपराधों से जुड़े हैं।
CJP ने आदेश पर जताई नाराजगी
कॉकरोच जनता पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के उस हिस्से पर चिंता जताई, जिसमें राज्यों को एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है। पार्टी का कहना है कि यह सरकार की ओर से पहले दिए गए आश्वासन के विपरीत है।
सौरव दास बोले- सरकार चाहे तो अभी वापस ले सकती है केस
CJP के सौरव दास ने कहा कि सरकार और भाजपा-एनडीए शासित राज्य चाहें तो बिहार और असम की तरह एफआईआर वापस ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला अब भी सरकारों के हाथ में है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
बंगाल में जमानत सुनवाई के दौरान उठा आपराधिक रिकॉर्ड का मुद्दा
कोलकाता में गिरफ्तार 16 लोगों की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि इनमें से पांच लोग पहले भी आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं। बचाव पक्ष ने पूछा कि क्या इनमें से किसी को किसी मामले में दोषी ठहराया गया है, लेकिन इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। सुनवाई के बाद मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने कहा कि प्रथम दृष्टया किसी भी आरोपी के आपराधिक इतिहास का पर्याप्त प्रमाण सामने नहीं आया।
सरकार तलाश रही है कानूनी विकल्प
गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केवल सरकारी निर्देश से एफआईआर स्वतः समाप्त नहीं हो जाती। सरकार कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मामलों को अभियोजन चरण में वापस लेने या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।