नई दिल्ली: बढ़ते वजन का असर सिर्फ शरीर की बनावट और सेहत पर ही नहीं, बल्कि घुटनों के जोड़ों पर भी पड़ता है। शरीर का वजन बढ़ने से घुटनों पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर चलते समय, सीढ़ियां चढ़ते-उतरते या कुर्सी से उठते वक्त। लंबे समय तक यह दबाव बने रहने से घुटनों में दर्द, अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। जिन लोगों को पहले से ऑस्टियोआर्थराइटिस है, उनके लिए बढ़ता वजन तकलीफ को और बढ़ा सकता है। ऐसे में वजन को नियंत्रित रखना घुटनों की सेहत के लिए अहम है।
पीएसआरआई अस्पताल के निदेशक और वरिष्ठ सलाहकार डॉ. गौरव प्रकाश भारद्वाज के अनुसार, वजन कम करने से घुटनों के जोड़ों पर पड़ने वाला दबाव घटाने और दर्द को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, आर्थराइटिस का जोखिम केवल वजन पर निर्भर नहीं करता। उम्र, आनुवंशिक कारण, पुरानी चोट और जोड़ों की मौजूदा स्थिति भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
क्या वजन घटाने से आर्थराइटिस का खतरा कम हो सकता है?
शरीर का अतिरिक्त वजन घुटनों के जोड़ों पर अधिक यांत्रिक दबाव डालता है। वजन कम करने से यह दबाव घट सकता है, जिससे घुटनों के दर्द में राहत और रोजमर्रा की गतिविधियों को करने में आसानी हो सकती है। खासकर ऑस्टियोआर्थराइटिस से जूझ रहे लोगों के लिए वजन नियंत्रित रखना फायदेमंद हो सकता है।
हालांकि, वजन घटाना आर्थराइटिस से पूरी तरह बचाव की गारंटी नहीं है। इस बीमारी के पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। इसलिए वजन पर नियंत्रण के साथ घुटनों की सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है।
कितना वजन घटाने से घुटनों को मिल सकता है फायदा?
जिन लोगों का वजन सामान्य से अधिक है और वे घुटनों में दर्द या ऑस्टियोआर्थराइटिस से परेशान हैं, उनके लिए शरीर के कुल वजन में 5 से 10 प्रतिशत तक की कमी फायदेमंद हो सकती है। इससे घुटनों पर पड़ने वाला दबाव कम करने, दर्द में राहत पाने और चलने-फिरने की क्षमता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, वजन घटाने का लक्ष्य हर व्यक्ति की उम्र, मौजूदा वजन और स्वास्थ्य के अनुसार तय किया जाना चाहिए। तेजी से वजन कम करने या बिना सलाह के सख्त डाइट अपनाने के बजाय धीरे-धीरे और टिकाऊ तरीके से वजन घटाना बेहतर है।
घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये तरीके
घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन पर नियंत्रण जरूरी है। अगर घुटनों में दर्द रहता है, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से कम प्रभाव वाले व्यायाम किए जा सकते हैं।
स्थिर साइकिल चलाना, तैरना और पानी में व्यायाम करना ऐसे विकल्प हैं, जिनसे जोड़ों पर अधिक दबाव डाले बिना शारीरिक गतिविधि बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, लंबे समय तक लगातार एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचें और अपनी दिनचर्या में नियमित गतिविधियों को शामिल करें।
अगर घुटनों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न बनी रहती है अथवा चलने-फिरने में परेशानी होती है, तो इसे केवल बढ़ते वजन का असर समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।