नई दिल्ली: अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में उनके माता-पिता इंडिया गेट पर धरने पर बैठे हैं। बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उनसे मिलने पहुंचे। दोनों ने अंकिता के माता-पिता के पास बैठकर उन्हें सांत्वना दी। कुछ देर परिवार के साथ रहने के बाद राहुल और प्रियंका अपने आवास लौट गए।
धरने पर बैठे अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें जेल में होना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति से अपील की कि जब तक सीबीआई की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल न बनाया जाए।
पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार से पूछे सवाल
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सीबीआई जांच पूरी होने से पहले ही दुष्यंत गौतम को सुरक्षा मिल गई है। उन्होंने सवाल किया कि मामले को इतनी जल्दी निपटाने का दबाव क्यों है और सरकार किसे बचाने की कोशिश कर रही है।
पवन खेड़ा ने यह भी पूछा कि क्या किसी व्यक्ति को ऊंचे पद पर इसलिए नियुक्त किया जा रहा है, ताकि उसे जांच से सुरक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि जब सत्ता में बैठे लोगों के मन से डर खत्म हो जाता है, तो इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। उनके मुताबिक, मामले में न्याय की उम्मीद कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है और पीड़ित परिवार को साथ देने के बजाय आरोपों के घेरे में आए व्यक्ति का समर्थन किया जा रहा है।
अलका लांबा बोलीं- चार साल बाद भी न्याय के लिए भटक रहा परिवार
कांग्रेस नेता अलका लांबा ने भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके माता-पिता पिछले चार साल से न्याय की मांग कर रहे हैं। ऐसे में परिवार को दोबारा धरने पर बैठने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
अलका लांबा ने दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि परिवार के साथ कांग्रेस खड़ी है और पार्टी इस फैसले का विरोध करेगी।
इमरान प्रतापगढ़ी ने बीजेपी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, लेकिन इसी राज्य में एक बेटी को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि परिवार ने एक वीआईपी पर आरोप लगाए हैं और मामले की जांच सीबीआई कर रही है। इसके बावजूद संबंधित व्यक्ति को राज्यपाल बना दिया गया।
इमरान प्रतापगढ़ी ने सरकार से नियुक्ति के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की और कहा कि कांग्रेस अंकिता के परिवार के साथ खड़ी है।
अंकिता के माता-पिता से सीबीआई ने की थी पूछताछ
अंकिता भंडारी हत्याकांड वर्ष 2022 में सामने आया था और इसने पूरे देश को झकझोर दिया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसी साल फरवरी में मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके करीब आठ महीने बाद हाल ही में सीबीआई के दो अधिकारी दिल्ली से पौड़ी जिले में अंकिता के पैतृक गांव पहुंचे और उनके माता-पिता से कई घंटे तक पूछताछ की।
अंकिता के परिवार और कांग्रेस की ओर से दुष्यंत गौतम का नाम इस मामले से जुड़े कथित वीआईपी के संदर्भ में उठाया जाता रहा है। कांग्रेस ने उनकी राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन करने की घोषणा की है। मंगलवार को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य गणेश गोदियाल ने देहरादून के गांधी पार्क में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने एक घंटे तक प्रतीकात्मक मौन रखा था।
रिजॉर्ट में काम करती थीं अंकिता, चार दिन बाद नहर में मिला था शव
19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। घटना के चार दिन बाद उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था।
इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को अदालत ने दोषी ठहराया था और तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
पिछले साल दिसंबर में यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया था। उस समय पूर्व बीजेपी विधायक सुरेश राठौर और खुद को उनकी पत्नी बताने वाली अभिनेत्री उर्मिला सनावर के बीच कथित बातचीत के कुछ ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इसके बाद हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर नए सिरे से सवाल उठने लगे।
विरोध प्रदर्शनों के बाद सीबीआई जांच की हुई थी सिफारिश
अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों में अंकिता के माता-पिता भी शामिल हुए। विरोध बढ़ने के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।