नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और केंद्र सरकार के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। सीजेपी ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि धर्मेंद्र प्रधान को पद से नहीं हटाया गया या उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया तो एक बार फिर संसद की ओर मार्च किया जाएगा। हालांकि सरकार के भीतर से मिल रहे संकेत बताते हैं कि फिलहाल धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से हटाने पर कोई सहमति नहीं है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार का क्या रुख है?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि किसी संगठन या समूह के दबाव में आकर किसी केंद्रीय मंत्री को हटाने की परंपरा नहीं बनाई जा सकती। सूत्रों का कहना है कि यदि इस तरह की मांग स्वीकार की गई तो भविष्य में कोई भी समूह किसी भी मंत्री, यहां तक कि प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दबाव बना सकता है। इसी वजह से सरकार धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के पक्ष में नजर नहीं आ रही है।
जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से हुई थी अहम बैठक
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से उठाई थी। हालांकि बातचीत के बावजूद इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे।
सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए तैयार
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह सार्वजनिक परीक्षाओं की प्रक्रिया में मौजूद खामियों को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाने को तैयार है। प्रधानमंत्री पहले ही परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कार्रवाई का भरोसा जता चुके हैं। बताया जा रहा है कि नीट अभ्यर्थियों की आत्महत्या से जुड़े मामलों में मुआवजे के प्रस्ताव पर भी सरकार नियमों और प्रक्रियाओं के तहत विचार कर सकती है।
एनटीए पर बड़ी कार्रवाई, 47 अधिकारियों की बर्खास्तगी
पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। इसे परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कार्रवाई माना जा रहा है।
संसद में जारी है गतिरोध
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर मानसून सत्र में लगातार हंगामा जारी है। विपक्ष का रुख भी साफ है कि पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए, उसके बाद ही पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में चर्चा होगी। दूसरी ओर सरकार पेपर लीक से जुड़े मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान करने वाला विधेयक लाने की तैयारी में है। साथ ही प्रधानमंत्री पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था का भी ऐलान कर चुके हैं।