अगर आप सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं या आपके घर में शादी-ब्याह का माहौल है, तो यह खबर आपकी जेब पर बड़ा असर डाल सकती है। भारतीय सर्राफा बाजार में सोने के भाव में पहले ही ₹34,000 प्रति 10 ग्राम की बड़ी गिरावट आ चुकी है।
जो सोना 29 जनवरी 2026 को ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया था, वह आज (5 अगस्त) फिसलकर ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। लेकिन वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council – WGC) की ताजा रिपोर्ट की मानें, तो क्रैश का यह दौर अभी रुकने वाला नहीं है!
WGC की चेतावनी: जानिए कितना गिर सकता है सोने का भाव?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने अपनी नई रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार के निवेशकों के लिए बड़ा अलर्ट जारी किया है:
- 37% तक बड़े करेक्शन का खतरा: WGC के मुताबिक, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $3,857 प्रति औंस के अहम सपोर्ट लेवल को तोड़ता है, तो इसमें 37% तक की ऐतिहासिक गिरावट आ सकती है।
- अगला स्टॉप $3,500 प्रति औंस: यदि यह सपोर्ट टूटता है, तो सोने का अगला फ्लोर $3,500 प्रति औंस होगा। जनवरी में अपने उच्चतम स्तर ($5,070.21) को छूने वाला सोना अब 52-हफ्तों के हाई ($5,595.51) से फिसलकर $4,127.96 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।
- लंदन बुलियन मार्केट का डेटा: लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) के अनुसार, इस साल सोने में अब तक लगभग 7.8% की सीधी कमजोरी दर्ज की जा चुकी है।
क्या जापानी येन और अमेरिकी डॉलर संभालेंगे गिरता सोना?
सोने की आगे की चाल काफी हद तक दुनिया की दो बड़ी करेंसी—अमेरिकी डॉलर (USD) और जापानी येन (JPY)—पर निर्भर करेगी:
- जापानी येन की रिकवरी: WGC का कहना है कि अगर जापानी येन में मजबूती लौटती है और अमेरिकी डॉलर दबाव में आता है, तो सोने की कीमतों को नीचे गिरने से बड़ा सहारा (Support) मिल सकता है।
- US Federal Reserve का फैसला: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव न करने का रुख अपनाया हुआ है। अगर अमेरिका में ब्याज दरें स्थिर रहती हैं, तो डॉलर कमजोर होगा और निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर फिर से सोने का रुख कर सकते हैं।
ईरान युद्ध, कच्चा तेल और होर्मुज का पूरा खेल
सोने की इस भारी उठापटक के पीछे असली वजह ईरान और मध्य पूर्व (Middle East) का युद्ध और कच्चे तेल की कीमतें हैं।
- शांति समझौते की उम्मीद: अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में शांति समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने की खबरें आ रही हैं। ईरान ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को खुला रखने के लिए तैयार हो गया है।
- महंगाई और क्रूड ऑयल: अगर युद्ध टलता है, तो कच्चे तेल के दाम गिरेंगे, जिससे वैश्विक महंगाई घटेगी। इससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की चिंता खत्म होगी, जो अंततः सोने के रेट्स को स्थिरता प्रदान करेगा।