ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की जंग को अब 18 दिन हो चुके हैं। इस दौरान कई मौकों पर ईरान ने भी जवाबी हमले कर अपनी ताकत दिखाई है, लेकिन लगातार हो रहे हमलों में उसके कई बड़े नेताओं के मारे जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
ताजा घटनाक्रम में ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारीजानी की एक हमले में मौत हो गई है। उनकी मौत को ईरान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे देश की रणनीतिक और सैन्य नीति तय करने में अहम भूमिका निभाते थे।
लारीजानी को ईरान के सुप्रीम लीडर के बाद सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता था और वे अमेरिका व इजराइल के खिलाफ युद्ध रणनीति बनाने में अग्रणी थे।
इससे पहले, 28 फरवरी को संघर्ष के शुरुआती दिन ही सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की खबर सामने आई थी। इसके बाद लारीजानी देश के प्रमुख फैसलों को संभालते हुए नजर आ रहे थे।
विश्लेषकों के अनुसार, इस संघर्ष में ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के टॉप 7 में से 6 नेताओं को मार गिराया। इसे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और संभावित राजनीतिक बदलाव की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
आयतुल्लाह अली खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर थे और देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माने जाते थे। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के पहले दिन ही उनके मारे जाने की खबर सामने आई, जिसकी बाद में पुष्टि भी हुई।
खामेनेई 1989 से इस पद पर थे और उनके पास सेना, न्यायपालिका तथा प्रमुख राजनीतिक फैसलों पर अंतिम अधिकार था। ईरान की परमाणु और रक्षा नीति पर उनका गहरा प्रभाव रहा। उनकी मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने की बात कही जा रही है, और रिपोर्ट्स के मुताबिक वे भी संभावित निशाने पर हैं।
अली लारीजानी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव थे और देश की सुरक्षा रणनीति के प्रमुख चेहरे माने जाते थे। वे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम फैसलों में केंद्रीय भूमिका निभाते थे।
लारीजानी इससे पहले ईरान की संसद के स्पीकर भी रह चुके थे और परमाणु वार्ताओं व विदेश नीति में भी उनका प्रभाव रहा। उनकी मौत को ईरान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि रणनीतिक रूप से यह नुकसान बेहद गंभीर है।
अली शामखानी ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा ढांचे के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। वे सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार रहे और देश के रक्षा मंत्री का पद भी संभाल चुके थे।
उन्होंने ईरान की क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति और सैन्य योजनाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कूटनीति और सैन्य दोनों क्षेत्रों में उनका प्रभाव मजबूत माना जाता था। हालिया हमलों में उनकी भी मौत की खबर सामने आई है।
मोहम्मद पाकपोर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ थे। IRGC को देश की सबसे ताकतवर सैन्य संस्थाओं में गिना जाता है। पाकपोर आंतरिक सुरक्षा और सैन्य अभियानों की निगरानी करते थे और लंबे समय से ईरान की रक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को हुए शुरुआती हमलों के दौरान उनकी मौत हो गई।
अमीर नासिरजादेह ईरान के रक्षा मंत्री थे और देश की सैन्य रणनीति, हथियार विकास और रक्षा नीतियों के प्रमुख जिम्मेदार थे। वे पहले वायुसेना में वरिष्ठ पदों पर रह चुके थे और ईरान के ड्रोन व एविएशन कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में उनका अहम योगदान रहा। हालिया हमलों में उनके मारे जाने की खबर सामने आई है।
अब्दुल रहीम मौसवी ईरान की सशस्त्र सेनाओं के चीफ ऑफ स्टाफ थे। इस पद पर रहते हुए वे सेना के विभिन्न अंगों के बीच समन्वय और सैन्य अभियानों के संचालन के लिए जिम्मेदार थे। उन्हें देश के सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों में गिना जाता था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल के हमलों में उनकी भी मौत हो गई।
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