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डायबिटिक फुट का छोटा घाव भी बन सकता है बड़ा खतरा! सिर्फ ड्रेसिंग नहीं, समय पर इलाज से बच सकती हैं गंभीर जटिलताएं

लखनऊ: डायबिटीज के मरीजों के पैरों में होने वाले छोटे छाले, जूते की रगड़ या त्वचा की हल्की दरार को सामान्य घाव मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे घाव समय के साथ गंभीर रूप ले सकते हैं। समय पर जांच, सही ड्रेसिंग और उचित इलाज के जरिए संक्रमण और अन्य जटिलताओं से बचाव संभव है।

डायबिटीज में पैरों के घाव क्यों बनते हैं गंभीर?

पुणे स्थित इनामदार मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. सादिक मुल्ला के अनुसार, लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर अधिक रहने से पैरों की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके कारण दर्द, गर्मी, ठंड या चोट का एहसास कम होने लगता है। ऐसे में मरीज को घाव का पता देर से चलता है और बिना अधिक दर्द के वह धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकता है।

घाव जल्दी नहीं भरने की यह है बड़ी वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक, डायबिटीज के कारण पैरों में रक्त संचार भी प्रभावित हो सकता है। जब घाव तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंचता, तो ऑक्सीजन, पोषण और संक्रमण से लड़ने वाले तत्व भी कम मात्रा में पहुंचते हैं। यही वजह है कि ऐसे मरीजों में घाव भरने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और संक्रमण तेजी से फैल सकता है। ऐसे मामलों में केवल नियमित ड्रेसिंग कराना पर्याप्त नहीं माना जाता।

जांच से तय होती है इलाज की दिशा

डॉक्टर घाव की केवल बाहरी स्थिति ही नहीं देखते, बल्कि उसकी गहराई, मवाद, बदबू, आसपास की सूजन या लालपन, पैर में रक्त संचार और संवेदनशीलता की भी जांच करते हैं। कई मामलों में संक्रमण त्वचा और मांसपेशियों से आगे बढ़कर हड्डी तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में खून की जांच, एक्स-रे, एमआरआई या घाव से सैंपल लेकर जांच की जा सकती है।

इलाज में किन बातों का रखा जाता है ध्यान

विशेषज्ञों के अनुसार, उपचार के दौरान घाव के मृत या खराब हिस्से को हटाना, घाव पर पड़ने वाले दबाव को कम करना, ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना और पैर में पर्याप्त रक्त संचार बनाए रखना जरूरी होता है। यदि संक्रमण मौजूद हो, तो उसकी गंभीरता के अनुसार एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। वहीं, जिन मरीजों में पैरों में खून का बहाव बहुत कम हो जाता है, उन्हें खून की नसों के विशेषज्ञ की सलाह के साथ एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रिया की आवश्यकता भी पड़ सकती है।

इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

अगर घाव के आसपास सूजन बढ़ रही हो, मवाद या बदबू आने लगे, त्वचा काली पड़ने लगे, बुखार हो, घाव लगातार गहरा होता जाए या ब्लड शुगर अचानक बढ़ जाए, तो इसे गंभीर चेतावनी माना जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में घरेलू उपाय, बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना या केवल ड्रेसिंग के भरोसे रहना नुकसानदायक साबित हो सकता है।

 

vineet verma

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