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ऑफिस में AI की एंट्री और कर्मचारियों की एग्जिट! 5 महीनों में 1.16 लाख नौकरियां गईं, आखिर क्यों बढ़ रहा है संकट?

हैदराबाद: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने दुनियाभर की टेक इंडस्ट्री की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। साल 2026 के पहले पांच महीनों में ही वैश्विक टेक सेक्टर में 1,16,739 कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है। लगातार बढ़ते इस आंकड़े ने कर्मचारियों के बीच भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बड़ी टेक कंपनियां अब पारंपरिक नौकरियों की जगह एआई आधारित सिस्टम और ऑटोमेशन पर ज्यादा निवेश कर रही हैं।

पांच महीने में लाखों नौकरियां गईं, मई में सबसे तेज बढ़ी छंटनी

ताजा आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से मई 2026 के बीच टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी हुई है। पिछले साल की तुलना में यह संख्या काफी अधिक है। मई 2025 में जहां करीब 10,577 कर्मचारियों की नौकरी गई थी, वहीं मई 2026 में अकेले 28,889 लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। यानी एक साल के भीतर छंटनी की रफ्तार कई गुना बढ़ गई है।

मार्च बना सबसे बुरा महीना

साल 2026 में मार्च सबसे ज्यादा प्रभावित महीना साबित हुआ। इस दौरान 46 हजार से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया। रिपोर्ट्स के अनुसार अधिकांश कंपनियां लागत घटाने और एआई परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। इसके चलते कई विभागों में मानव संसाधन की जरूरत कम की जा रही है।

किन बड़ी कंपनियों ने घटाया स्टाफ?

इस साल कई वैश्विक टेक कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती की है। उबर ने अपने पीपल एंड प्लेसेज डिवीजन में 23 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी की। यह विभाग भर्ती, मानव संसाधन और कार्यस्थल प्रबंधन से जुड़ा हुआ है।

मेटा ने भी अपनी वैश्विक कार्यबल में 10 प्रतिशत कटौती का फैसला लिया। साथ ही करीब 7,000 कर्मचारियों को एआई आधारित भूमिकाओं में स्थानांतरित किया गया। दूसरी ओर पेपाल ने अगले दो से तीन वर्षों में अपनी कुल कार्यबल का लगभग 20 प्रतिशत घटाने की योजना बनाई है।

सिस्को ने भी करीब 4,000 पद समाप्त करने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि बचाए गए संसाधनों को एआई, साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों में लगाया जाएगा। वहीं क्लिकअप ने अपने 22 प्रतिशत कर्मचारियों को हटाकर दावा किया कि एआई की मदद से कार्य क्षमता कई गुना बढ़ाई जा सकती है।

क्या सचमुच AI नौकरियां खा रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई सीधे तौर पर हर नौकरी खत्म नहीं कर रहा, बल्कि काम करने का तरीका बदल रहा है। जिन कार्यों को पहले कई कर्मचारी मिलकर पूरा करते थे, अब उनमें से कई काम ऑटोमेशन और एआई टूल्स के जरिए तेजी से किए जा रहे हैं। इसका असर विशेष रूप से उन नौकरियों पर पड़ रहा है जो पूरी तरह कंप्यूटर आधारित और दोहराव वाली प्रक्रियाओं पर निर्भर हैं।

भारत के लिए राहत की खबर भी है

भारत के आईटी सेक्टर को लेकर तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यहां एआई के कारण नौकरियां पूरी तरह खत्म नहीं हो रहीं, बल्कि नई तरह की भूमिकाएं पैदा हो रही हैं। खासतौर पर ऐसे पेशेवरों की मांग बढ़ रही है जिनके पास तकनीकी ज्ञान के साथ एआई टूल्स का व्यावहारिक अनुभव भी हो।

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में एआई आधारित प्रोजेक्ट्स तेजी से बढ़ रहे हैं और कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं जो पारंपरिक तकनीकी कौशल के साथ एआई का उपयोग करना जानते हों।

आने वाले समय में क्या बदल सकता है?

तकनीकी क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि अगले 12 से 18 महीनों में कई व्हाइट-कॉलर नौकरियों की प्रकृति बदल सकती है। कंपनियां अब केवल डिग्री या अनुभव नहीं, बल्कि एआई के साथ काम करने की क्षमता को भी महत्वपूर्ण मान रही हैं। ऐसे में तकनीकी क्षेत्र में बने रहने के लिए कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप खुद को लगातार अपडेट करना होगा।

 

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