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करोड़ों व्यूज, लाखों फॉलोअर्स और अब सस्पेंशन! ड्यूटी छोड़ रील्स बनाने वाले ट्रैफिक हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी पर गिरी गाज

शहडोल: सोशल मीडिया पर ट्रैफिक नियमों को लेकर वीडियो बनाकर करोड़ों लोगों तक पहुंच बनाने वाले ट्रैफिक हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी अब खुद कार्रवाई के घेरे में आ गए हैं। शहडोल पुलिस अधीक्षक ने उन्हें निलंबित कर दिया है। आरोप है कि वह पिछले 15 दिनों से बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित थे और इस दौरान निजी प्रचार एवं लाभ के लिए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे थे।

15 दिन गैरहाजिर रहने का आरोप, जारी हुआ निलंबन आदेश

जारी निलंबन आदेश के मुताबिक यातायात थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी 19 मई 2026 से लगातार ड्यूटी से अनुपस्थित थे। आदेश में कहा गया है कि इस अवधि के दौरान उन्होंने विभिन्न स्थानों पर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए, जो पुलिस रेगुलेशन और सेवा शर्तों के विपरीत है।

आदेश में इसे कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर रक्षित केंद्र शहडोल संबद्ध करने की बात कही गई है।

सोशल मीडिया पर मचा बवाल, लोगों ने पूछे सवाल

जैसे ही निलंबन की खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने कार्रवाई को उचित बताया तो कुछ ने हेड कांस्टेबल के समर्थन में आवाज उठाई। अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर हजारों टिप्पणियां देखने को मिलीं, जिनमें लोग पूरे मामले की सच्चाई जानने की कोशिश करते नजर आए।

एसपी ने खुद बताया कार्रवाई का कारण

दिनभर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच शहडोल पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर कार्रवाई का कारण स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा कि शासकीय ड्यूटी से 15 दिनों तक बिना सूचना अनुपस्थित रहकर व्यक्तिगत लाभ के लिए वीडियो बनाने के कारण यातायात प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी को निलंबित किया गया है।

कार्रवाई के बाद विवेकानंद तिवारी का जवाब

निलंबन के बाद विवेकानंद तिवारी ने भी सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि वह बिना सूचना गैरहाजिर नहीं थे। उन्होंने लिखा कि पिछले तीन महीनों से वह मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें नींद न आना, घबराहट, बेचैनी और सड़क दुर्घटनाओं के बाद मानसिक तनाव जैसी परेशानियां हो रही थीं।

उनके अनुसार 19 मई को उन्होंने मोबाइल फोन के माध्यम से यातायात थाने को अपने स्वास्थ्य की जानकारी दी थी और मेडिकल कॉलेज जाकर मनोचिकित्सक से इलाज कराया था। डॉक्टर ने उन्हें एक सप्ताह आराम करने की सलाह दी थी और दवाइयां भी दी थीं।

व्हाट्सएप ग्रुप में मेडिकल पर्ची भेजने का दावा

विवेकानंद तिवारी ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि मेडिकल कॉलेज से प्राप्त पर्ची उन्होंने विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की थी, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी भी जुड़े हुए थे। उनका कहना है कि इसके बावजूद उसी दिन दोपहर बाद उनकी ड्यूटी जय स्तंभ चौक पर लगा दी गई और बाद में उन्हें गैरहाजिर दर्ज कर लिया गया।

उन्होंने कहा कि वह विभाग की गरिमा बनाए रखना चाहते थे और सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण उन्हें अपनी बात और दस्तावेज सामने रखने पड़े। पोस्ट के साथ उन्होंने इलाज से संबंधित मेडिकल दस्तावेज भी साझा किए हैं।

अब दोनों पक्षों के दावों पर टिकी निगाहें

एक तरफ पुलिस प्रशासन का कहना है कि प्रधान आरक्षक बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित थे, वहीं दूसरी तरफ विवेकानंद तिवारी ने स्वास्थ्य कारणों और विभाग को सूचना देने का दावा किया है। ऐसे में पूरे मामले को लेकर अब सभी की नजरें आगे होने वाली विभागीय कार्रवाई और जांच पर टिकी हुई हैं।

 

vineet verma

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