20 जुलाई 2026 को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज और जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाए जाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
चीफ जस्टिस देवेन्द्र उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने दायर जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट ने सुरक्षाबलों को संसद मार्च के दौरान के सभी बॉडी कैमरा फुटेज, सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और बल प्रयोग से जुड़े अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का बड़ा आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए और इसे “औपनिवेशिक काल जैसी क्रूरता” करार दिया:
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया तय की है:
इसी सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने 18 जुलाई को जंतर-मंतर से जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाने की पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के कदम को चुनौती देने वाली याचिका में राहत देने से इनकार कर दिया। मामले में अगली कानूनी प्रक्रिया अब 11 सितंबर को पुलिस का जवाब आने के बाद आगे बढ़ेगी।
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